अमृतसर | श्रीश्री गौर निताई मंदिर इस्कॉन वृंदावन गार्डन में गौर पूर्णिमा के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय श्री गौर भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु़ओं ने दिव्य कथामृत का रसपान किया। कथा व्यासपीठ से इंद्रानुज प्रभु ने अपने मुखारविंद से भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु और श्री नित्यानंद प्रभु की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। प्रभु ने महाप्रभु की सन्यास दीक्षा, श्री नित्यानंद प्रभु द्वारा उन्हें शांति पुर ले जाना, माता की आज्ञा से संन्यास धर्म का पालन, क्षीर चोरा गोपीनाथ की कथा, रामचंद्र खान पर कृपा, धोबी को प्रेमदान तथा दक्षिण भारत यात्रा की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महाप्रभु ने अपनी दक्षिण यात्रा में कुष्ठ रोगी वासुदेव, त्रिमंड के बौद्धों, बटेश्वर में तीर्थ राम उनकी पत्नी और वेश्याओं का उद्धार किया। ईर्षालु ब्राह्मण को अपमान के बदले प्रेमदान दिया, श्रीरंग में गोपाल भट्ट पर कृपा की, मदुरै में राम भक्त विप्र का उद्धार किया, बगुला वन में पंथ भील, जैजुरी में देवदासियों तथा चोरा नंदी वन में नौरोजी डाकू का भी उद्धार किया। कार्यक्रम के अंत में प्रभु जी ने हरिनाम संकीर्तन में ‘जगन्नाथ स्वामी नयन पथ गामी’ और महामंत्र का जाप करवाया। जिससे सभी भक्तों को नृत्य के लिए प्रेरित कर दिया।


