उदयपुर के प्रसिद्ध शिल्पग्राम के ठीक पीछे 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 15.40 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा अनूठा उपक्षेत्रीय विज्ञान केंद्र (प्लेनेटेरियम यानी तारामंडल) अब आकार लेने लगा है। इसका 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत कार्य जुलाई तक पूरा हो जाएगा। अगस्त 2025 तक तारामंडल को स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, शहरवासियों और पर्यटकों के लिए खोलने का लक्ष्य है। इस निर्माणाधीन उपक्षेत्रीय विज्ञान केंद्र में सन गैलरी (सूर्य दीर्घा), मनोरंजन विज्ञान केंद्र में तैरती गेंद, यांत्रिक भूलभुलैया, स्वर मंडल, राइजिंग बबल, भंवर, आरोही चिंगारी, चमत्कारी नल, पाइथागोरस प्रमेय, तीव्र पथ के विज्ञान मॉडल स्थापित हो चुके हैं। सूर्य को विभिन्न रंगों, आकृतियों के रूप में भी प्रदर्शित कर आस-पास के वायुमंडल को भी वैज्ञानिक रूप से प्रदर्शित किया है। ऐसा है भवन 800 वर्ग मीटर में बना है प्रदर्शनी हॉल। 500 वर्ग मीटर में ऑडिटोरियम, वार्ता कक्ष, दो हॉल, जन सुविधाएं हैं। 200 वर्ग मीटर ऑफिस, लेबोरेटरी आदि बने हुए हैं। 13 करोड़ खर्च राशि 2.40 करोड़ नई राशि स्वीकृत। 15.40 करोड़ कुल खर्च होगा। बच्चों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, विज्ञान प्रेमियों को विज्ञान की बारीकियों से रूबरू कराना उद्देश्य कोलकाता तारामंडल की तर्ज पर तैयार किए जा रहे इस तारामंडल में विज्ञान प्रेमियों को धरती पर ही ब्रह्मांड में होने जैसा अहसास होगा, जहां साउंड प्रूफ ऑडिटोरियम में सूर्य, चांद, गृहों, तारों की दुनिया धरती पर दिखाई देगी। यहां 7डी में सूरज, चांद, ग्रहों, तारों की दुनियां (ब्रह्मांड) को फिल्म के रूप में देखा-सुना जा सकेगा। इस उपक्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का निर्माण केंद्र-राज्य सरकार, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद कोलकाता और उदयपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से किया जा रहा है।


