इस बार होली पर जिले की फिजां सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की खुशबू से भी महकने वाली है। ग्राम धमनी की ‘वंदनी स्व सहायता समूह’ की 11 महिलाओं ने हर्बल गुलाल तैयार कर स्थानीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना ली है। प्राकृतिक फूलों, हल्दी और अन्य वनस्पति तत्वों से तैयार यह गुलाल न सिर्फ त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी भी कहता है। कुछ वर्ष पहले तक ये महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं। आज वे उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिला, जिसने उनके हुनर को व्यवसाय में बदल दिया। समूह की सदस्य बताती हैं कि शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन अब मांग इतनी बढ़ गई है कि उन्हें अतिरिक्त ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। हर्बल गुलाल की खासियत यह है कि इसमें किसी प्रकार के रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं किया जाता। महिलाएं फूलों को सुखाकर उनका पाउडर बनाती हैं, फिर उसमें प्राकृतिक खुशबू मिलाकर आकर्षक पैकिंग की जाती है।


