छह माह के गुणा-भाग और रायशुमारी से बना ‘अबुआ बजट’

रांची | वित्त ने सोमवार को विधानसभा में वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया। सरकार के विजन डॉक्यूमेंट को तैयार करने में करीब छह माह का समय लगा। सितंबर में अबुआ बजट की शुरुआत के लिए विभागों से पत्राचार हुआ। इसके बाद पैसे का गुणा-भाग शुरू हु​आ। वित्त और योजना विभाग के छह बड़े अफसरों के नए आइडिया को शामिल किया गया। आमजनों और विशेषज्ञों की रायशुमारी भी ली गई। 28 नवंबर को नई सरकार बनने के बाद काम में गति आई। जनवरी से रफ्तार काफी तेज हो गई। बजट बनाने में लगे लोगों ने 8 फरवरी के बाद 14-16 घंटे तक लगातार किया काम। पढ़िए… कौन हैं वे छह वरीय अधिकारी जिन्होंने अबुआ बजट बनाने में महती भूमिका निभाई। कुंदन कुमार योजना पदाधिकारी सत्यनारायण प्रसाद सेवानिवृत्त अधिकारी
इनका भी योगदान… बजट निर्माण में वित्त विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी दिलीप कुमार तिवारी, कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश केसरी, गौरव विश्वकर्मा का भी योगदान है। ये योजना और डेटा के कामों में शामिल रहते हैं। योजना विभाग में यूनिसेफ के परामर्शी समीर, प्रशाखा पदाधिकारी सुबोध कुमार, रोहित कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर अजीत वर्णवाल बजट के महत्वपूर्ण कामों में शामिल रहते हैं। कृष्णनंदन प्रसाद अपर सचिव, योजना मैनेजमेंट के मूल तत्वों पर फोकस: राज्य योजना सेवा के अधिकारी हैं। मैनेजमेंट के छात्र रह चुके हैं। मैनेजमेंट के मूल तत्वों को बजट में जगह देते हैं। सभी विभागों के साथ समन्वय का दायित्व भी है। चंद्रभूषण प्रसाद राज्य बजट पदाधिकारी आलेख व एटीआर भेजने का जिम्मा: राज्य योजना सेवा के अधिकारी हैं। झारखंड के​ ​सभी बजट में शामिल रहे हैं। योजना बजट के लिए सभी विभागों को निर्देश, आलेख व एटीआर कार्रवाई प्रतिवेदन का जिम्मेवारी इनपर है। मस्तराम मीणा सचिव, योजना विभाग साधन जुटाने में​ महारत हासिल : सांख्यिकी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर होने के बाद भी सेवा दे रहे हैं। बजट निर्माण में महारत हासिल है। वित्तीय मामलों खासकर साधन जुटाने के जानकार अधिकारी के रूप में पहचान है। प्रशांत कुमार सचिव, वित्त विभाग दूसरे विभागों से चर्चा कर जरूरत जानी: झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। दूसरे विभागों के बजट अधिकारियों के साथ बैठक की। उनकी आवश्यकता जानी। नई योजनाओं पर चर्चा की और उसे अंतिम रूप दिया। अफसरों से समन्वय बनाने में कुशल: 1996 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वित्त विभाग व अन्य विभागों से समन्वय बनाने में कुशलता हासिल है। लो प्रोफाइल होकर काम करते हैं, जिससे जूनियर अधिकारी भी सहजता महसूस करते हैं। बजट संतुलन पर रहे केंद्रित: 2004 बैच के आईएएस हैं। 20 वर्षों का अनुभव। जेएसएससी अध्यक्ष व जल संसाधन सचिव का दायित्व निभाते हुए बजट निर्माण में शामिल रहे। मातहतों की बात सुनी व संतुलन पर केंद्रित रहे।

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