कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अहम:व्याख्यान माला का आयोजन, खेतों में बराबरी से काम कर रही महिलाएं

महिला प्रकोष्ठ के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. राम कल्याण मीणा ने कहा कि स्त्रियों के योगदान का समुचित मूल्यांकन नहीं किया जाता, जबकि स्त्रियां कृषि अर्थव्यवस्था की मेरुदंड हैं और वह घरेलू कार्यों के साथ खेतों पर बराबरी से कार्य कर रही हैं। भूगोल विभाग की सहायक आचार्य डॉ. प्रमिला शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। 70 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। इनकी आजीविका का प्रमुख साधन कृषि एवं पशुपालन हैं। स्त्रियां फसल के चयन से लेकर कटाई तक कंधे से कंधा मिलाकर कृषि कार्य को बारीकी के साथ संपादित करती है और घर को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में अपनी मुख्य भूमिका अदा करती है। व्याख्यान माला में बोलते हुए भूगोल की सहायक आचार्य हर्षा जयसवाल ने कहा कि स्त्रीयां कृषि कार्य को मुख्य व्यवसाय के रूप में स्वीकार कर देश की सकल घरेलू उत्पाद स्तर को बढ़ा रही हैं। ऐसे बहुत सारे घरेलू व्यवसाय हैं, जो स्त्रियों ने नवाचार के रूप में स्थापित किए हैं। उन्होंने कृष्णा यादव, रूमा देवी आदि लघु उद्यमियों के उदाहरण देते हुए छात्राओं को बताया कि हम अपनी रुचियों को छोटे-छोटे उद्योगों के रूप में विकसित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। कृषि व्यवस्था में स्त्रियों की भूमिका पुरुषों के मुकाबले बेहतर है, लेकिन शिक्षा का अभाव कृषि के लिए कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। महिला प्रकोष्ठ संयोजिका प्रो. अलका बगला ने कहा कि वर्तमान समय में कई प्रकार से नई तकनीकियों के साथ कृषि का उत्पादन हो रहा है। कॉमर्शियल फार्मिंग,ऑर्गेनिक फार्मिंग, एक्वा फोनिक्स, टैरेस फार्मिंग, किचन गार्डन, डेयरी फार्मिंग, हाइड्रो फोनिक्स, पॉली हाउस, ड्राई फार्मिंग, वर्टिकल फार्मिंग इन तकनीकियों के साथ हम उन्नत स्तर की और ज्यादा मात्रा में हानि रहित कृषि का उत्पादन कर सकते हैं। स्त्रियां प्रत्येक पहलू पर सूक्ष्मता से विचार करती हैं। इसलिए खेती के क्षेत्र में भी उनकी मदद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. अशोक कंवर शेखावत ने कहा कि सामाजिक संरचना में बदलाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था और स्त्री की वर्तमान स्थितियों को लेकर बहुत सारी विसंगतियां उत्पन्न हो गई हैं। अब स्त्री घर और बाहर दोनों स्तरों पर अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य संपादन कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियां घर परिवार संभालने के साथ ही कृषि में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से खेतों में बराबरी से काम कर रही हैं। हमें कृषि के उत्पादन से लेकर विक्रय तक महिलाओं को कृषि में भागीदार बनाना चाहिए। इससे उनको कृषि क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।

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