भास्कर न्यूज | जालंधर इस महीने विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्य 14 मार्च तक ही पूरे किए जा सकेंगे। उसके बाद इन पर रोक रहेगी। विवाह के लिए चार ही दिन 9, 10, 11 और 12 मार्च ही शुभ हैं। 15 मार्च से खरमास शुरू होगा, जोकि 14 अप्रैल तक रहेगा। इस दौरान सूर्य मीन राशि में रहते हैं, इसलिए इसे मीन खरमास कहा जाता है। इस में रुटीन की खरीदारी यानी कपड़े या रोजमर्रा का सामान आदि खरीदने पर कोई सख्त रोक नहीं है, लेकिन पारंपरिक मान्यता के मुताबिक नए घर की खरीद, सोने-चांदी जैसी कीमती चीजें, नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य टाल देते हैं। इस वर्ष 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। तब से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसे ‘चतुर्मास’ कहा जाता है। इस कारण 25 जुलाई के बाद अक्टूबर तक ग्रहों की अनुकूल दशा नहीं होगी। विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। जिक्रयोग है कि होलाष्टक के बाद शुभ दिन शुरू हो चुके हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठानों का उद्घाटन 13 मार्च और नए प्रोजेक्ट या निवेश के लिए 23 मार्च दिन खास रहेगा। भूमि पूजन के लिए 6,9,13,14 तारीखें उत्तम हैं। वाहन के लिए 6, 8, 9 मार्च शुभ है। रेजिडेंसी विहार के आचार्य विजय शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन के बाद मार्च में विवाह के लिए बहुत ही सीमित अवसर उपलब्ध हैं। मार्च माह में 15 तारीख के बाद मांगलिक कार्यों पर फिर विराम लगेगा। तब सूर्य नारायण कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसे ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। खरमास की यह अवधि लगभग एक महीना रहेगी। सूर्य देव जब 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब खरमास की समाप्ति होगी। जो लोग मार्च के शुरुआती पखवाड़े में विवाह नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें अब अप्रैल के मध्य तक प्रतीक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उस समय नक्षत्र और ग्रह किस स्थिति में हैं। यदि ग्रहों की दशा प्रतिकूल हो, तो कार्यों में बाधा आने की संभावना रहती है। यही कारण है कि साल के कुछ महीनों को विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।


