कोटा नगर निगम ने शहर में जर्जर भवन के मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनें नोटिस में जर्जर भवनों को खुद तोड़ने के लिए कहा है। ऐसा नहीं करने पर निगम कार्रवाई करेगा। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया- शहर में बड़ी संख्या में भवन पुराने व जर्जर हैं। इनका नगर निगम की ओर से सर्वे कराया गया है। विशेष रूप से पुराने शहर में अनंत चतुर्दशी मार्ग व हैरिटेज वॉक मार्ग में ऐसे भवन ज्यादा हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद सर्वे करवाया गया था बरसात के समय झालावाड़ जिले के पिपलोदी में हुए स्कूल भवन की छत हादसे में बच्चों की मौत के बाद सभी सरकारी व निजी जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आयुक्त ने बताया कि उन नोटिसों में भवन मालिकों से कहा गया है कि वे खुद अपने स्तर पर जर्जर भवन हटा लें। अगर जल्द ही जर्जर भवन नहीं हटाए गए तो निगम की ओर से इन भवनों को तोड़ा जाएगा। उसमें आने वाला खर्च भवन मालिक से वसूला जाएगा। ये इलाके पुराने कोटा शहर में आते हैं। सबसे बड़ी बात अनंत चतुर्दशी व अन्य आयोजनों के दौरान यहां काफी भीड़ होती है। हजारों की तादाद में लोग मौजूद होते हैं। भीड़ के उन मकानों पर चढ़ने से हादसों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में निगम की तरफ से इन जर्जर भवनों को लेकर अब एक्शन लिया जा रहा है। हादसे के बाद नोटिस लेकिन एक्शन का इंतजार इधर, इन्द्र विहार में 7 फरवरी को हुए हादसे के बाद निगम और यूआईटी की ओर से शहर में अवैध बने भवनों, जर्जर भवनों का सर्वे करवाया गया था। कई को नोटिस जारी किए गए थे, कुछ भवन सीज किए गए। इन्द्र विहार में जहां हादसा हुआ, वहां चार भवन सीज हुए थे। इनमें से एक को तोड़ने के लिए समय दिया गया था। लेकिन अब तक उस भवन का भी सिर्फ एक मंजिल की छत ही टूट पाई है। निगम या यूआईटी की तरफ से अवैध बने भवनों को लेकर कोई सख्त एक्शन आज तक नहीं लिया गया है। जबकि हजारों की तदाद में बिना अनुमति के कई मंजिला भवन बने हुए हैं।


