पंजाब सरकार ने जसबीर सिंह गढ़ी को अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया है। इस बारे में सामाजिक न्याय अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने दो महीने पहले एक जनवरी को ही सीएम भगवंत मान की प्रधानगी में आम आदमी पार्टी जॉइन की थी। उन्होंने दिल्ली चुनाव के दौरान सीमापुरी विधानसभा में एक महीने तक वॉलंटियर के रूप में पार्टी का प्रचार किया, जिससे वहां आम आदमी पार्टी को जीत मिली। आदेश की कॉपी छह साल तक बसपा प्रधान रहे गढ़ी पंजाब के दलित समुदाय के प्रमुख नेता माने जाते हैं। वह छह वर्षों तक बहुजन समाज पार्टी (बसपा), पंजाब के अध्यक्ष रहे । उनके नेतृत्व में बसपा ने 25 वर्षों के बाद नवांशहर से विधायक जीतने में सफलता हासिल की।जसबीर सिंह गढ़ी विशेष रूप से गरीबों और दलितों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह नई जिम्मेदारी पंजाब काफी अहम मानी जा रही है। अनुशासनहीनता के आरोप पार्टी से निकाले थे चार महीने पहले पांच नवंबर 2024 को बसपा ने जसबीर सिंह गढ़ी को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उस समय वह पार्टी के प्रधान पद पर थे। उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।पार्टी ने उनकी जगह अवतार सिंह करीमपुरी को नया प्रधान बनाया है। हालांकि इससे जसबीर सिंह गढ़ी साल 2019 से बसपा प्रधान की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
उनकी अध्यक्षता में ही साल 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ा गया था। इस चुनाव में पार्टी ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन किया था। उनकी अध्यक्षता में ही BSP महासचिव नच्छतर पाल सिंह ने नवांशहर से जीत हासिल की थी। वहीं, उन्होंने खुद भी फगवाड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह 31232 वोटों (24.41%) लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।


