हर हर नाम निधान है, गुरमुख पाईया जाएं, जिन धूर मस्तक लिखिया, तिन सतगुर मिल आए…

भास्कर न्यूज |लुधियाना गुरुद्वारा श्री सुखमणी साहिब, दुगरी में एक भव्य कीर्तन समागम का आयोजन किया गया, जहां संगत ने मिलकर गुरबाणी का आनंद लिया और प्रभु के नाम में लीन हुई। इस पावन अवसर पर भाई अन्नत वीर सिंह ने कीर्तन कर संगत को गुरबाणी से जोड़ा। समागम की शुरुआत भाई अन्नत वीर सिंह द्वारा वाहेगुरु सिमरन से की गई। संगत ने एक स्वर में वाहेगुरु, वाहेगुरु का जाप किया, जिससे पूरा दरबार हाल वाहेगुरु नाम से गूंज उठा। इस दिव्य माहौल में श्रद्धालुओं ने गहरी श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रभु सिमरन किया। इसके पश्चात, भाई अन्नत वीर सिंह ने “हर के नाम सदा सुखदाई, हर हर नाम निधान है, गुरमुख पाईया जाएं। जिन धूर मस्तक लिखिया, तिन सतगुर मिल आए।इस पावन शबद का गायन कर संगत को प्रभु के नाम की महिमा से अवगत कराया। इसका भावार्थ है कि “प्रभु का नाम हर, हर सबसे महान खज़ाना है। गुरमुखों को यह प्राप्त होता है। सच्चे गुरु का मिलन उन्हीं से होता है, जिनके माथे पर ऐसा पूर्व-लिखित भाग्य अंकित होता है। इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों ने रागी जत्थों को सिरोपा डालकर सम्मानित किया। संगत ने भी कीर्तन दरबार में शामिल होकर अपना तन, मन और आत्मा गुरु चरणों में अर्पित किया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अरविंदर सिंह संधू ने सभी श्रद्धालु संगत का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस पावन समागम में अपनी हाज़िरी लगाई और गुरबाणी का आनंद लिया। समागम के समापन पर गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया, जिसमें हज़ारों श्रद्धालुओं ने गुरु प्रसाद ग्रहण किया। इस शुभ अवसर पर विसाखा सिंह, राम सिंह, कवल नैन सिंह भाटिया सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और गुरु की बाणी में लीन होकर आनंद प्राप्त किया।

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