निर्दलीय विधायक यूनुस खान का विधानसभा में सवाल:वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए क्या विशेष नीति बनाई है, वर्तमान में केवल यजुर्वेद का अध्ययन हो रहा

निर्दलीय विधायक यूनुस खान ने विधानसभा में प्रदेश में वैदिक शिक्षा काे लेकर चिंता जाहिर करते हुए सवाल उठाए। विधायक खान ने विधानसभा में पूछा कि राज्य सरकार वेद विद्यालयाें और वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार काे लेकर क्या काेई विशेष नीति बनाई है? शुक्रवार काे मंत्री ओटाराम देवासी के जवाब के दाैरान विधायक खान ने पूरक प्रश्न पूछा कि वर्तमान में वेद विद्यालयाें में केवल यजुर्वेद का अध्ययन करवाया जा रहा है, क्या सरकार इसके अलावा बाकी वेद ऋग्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के अध्ययन के साथ नए वेद विद्यालय खाेलने का विचार रखती है। विधायक के वेद शिक्षा पर चिंता जाहिर कर विधानसभा में सवाल उठाने पर इनमें कार्यरत वेद शिक्षकाें ने प्रशंसा की है। विधानसभा में पहली बार वैदिक शिक्षा काे लेकर राज्य सरकार की याेजनाओं काे लेकर सवाल पूछ गया और तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध हुआ। वेद शिक्षा पर मुस्लिम विधायक ने सवाल भी पूछे Q. क्या सरकार वेद विद्यालयाें में कार्यरत शिक्षकाें का मानदेय बढ़ाने का विचार रखती है?
-वेद विद्यालयाें में कार्यरत शिक्षकाें का मानदेय 8 से बढ़ाकर 15 हजार करने की घाेषणा हुई है और नवंबर 2024 में इसकी वित्तिय स्वीकृति मिल चुकी है। Q. वेद विद्यालयाें में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियाें की छात्रवृति बढ़ाने और शाेध के लिए वित्तीय सहायता का विचार रखती है?
-राजस्थान संस्कृत अकादमी द्वारा संचालित वेद विद्यालयाें में अध्ययनरत छात्राें काे 500 रुपए प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जा रही है। छात्रवृत्ति बढ़ाने काे फिलहाल काेई विचार नहीं है। Q. क्या वेद विद्यालयाें में धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा, समग्र शैक्षिक और राेजागाराेन्मुख पाठ्यक्रम जाेड़ने का विचार सरकार रखती है?
– वेद विद्यालयाें में अध्ययनरत छात्राें काे सरंक्षक संस्था द्वारा निकटतम विद्यालय में प्रवेश दिलाकर आगे शिक्षा जारी रखी जाती है और सुबह-शाम 2-2 घंटे स्वाध्याय करवाया जाता है। जनेऊ उतारने पर पत्र लिखा था, संस्कृत में शपथ लेकर चाैंकाया था ऐसा पहली बार नहीं है कि विधायक यूनुस खान ने इस तरह के मुद्दे उठाए हाे। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भर्ती परीक्षा के दाैरान छात्राें की जनेऊ उतारने पर विराेध करते हुए सरकार काे पत्र लिखा था और विधानसभा में सवाल उठाया था कि किन नियमाें के तहत जनेऊ उतारी गई। यूनुस खान ने विधानसभा में ही कुलपति शब्द की शास्त्रीयता विवेचन करते हुए रामायण और महाभारत के साथ कालिदास और भव भूति के ग्रंथाें का संदर्भ देकर दिया था। विधायक बनने के बाद संस्कृत में शपथ लेकर सबकाे चाैंका दिया था। मुस्लिम विधायक ने वैदिक शिक्षा सरंक्षण किया, यह स्वागत याेग्य है
“वेद मानव जाति के पुरातनतम ग्रंथ हैं, जो धर्म के प्रतिपादक हैं। ये सनातन धर्म के मूल हैं। इनको सुरक्षित रखना समाज और सरकार का दायित्व है। अच्छी बात है कि मुस्लिम विधायक यूनुस खान वैदिक शिक्षा के संरक्षण के प्रति सचेत हैं। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।”
– शास्त्री कोसलेन्द्रदास, विभागाध्यक्ष, राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय

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