विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी भले ही कम हो लेकिन सदन में उनकी उपस्थिति बढ़ रही है। इसके साथ सवाल पूछने में भी वे अब नहीं झिझकती। मौजूदा सत्र व 15वें विधानसभा सत्र में उनकी उपस्थिति व पूछे गए सवालों की संख्या इस बात की पुष्टि करती। आंकड़े बताते हैं, 16वीं विधानसभा में 21 में से 15 महिला विधायकों की उपस्थिति 75% से ज्यादा रही। इनमें से 10 विधायकों की 100% अटेंडेंस रही। वहीं 15वीं विधानसभा में 81% महिलाओं की उपस्थिति 75% से अधिक रही। जहां तक सवालों की बात है तो उसमें भी उनकी भागीदारी ताकतवर तरीके से दिखाई देती है। मौजूदा विधानसभा के सत्रों में महिला विधायकों ने कुल 106 प्रश्न पूछे। इनमें सबसे अधिक भरतपुर की विधायक ऋतु बनावत ने 23 प्रश्न पूछे। सदन में उनकी उपस्थिति 88% उपस्थित रहीं। इसके बाद सवाई माधोपुर की विधायक इंद्रा का स्थान है। उन्होंने सदन में 22 सवाल पूछे। तीसरे स्थान पर दीप्ति किरण माहेश्ववरी हैं जिन्होंने कुल 20 सवाल पूछे। इस सत्र में 48% महिला विधायकों की अटेंडेंस 100% रही यानी वे हर दिन सदन में उपस्थित रहीं। इसके अलावा 15वीं विधानसभा में 81% महिला विधायकों की 75% से अधिक अटेंडेंस रही। 72% महिला विधायकों के पास है पीजी डिग्री
16वीं विधानसभा की 17 महिला विधायकों की न्यूनतम एजुकेशन क्वालिफिकेशन ग्रेजुएशन है। यानी 4 विधायकों को छोड़कर सभी महिलाएं ग्रेजुएट हैं। वहीं इनमें से 11 महिलाओं ने पीजी की पढ़ाई की है। इसके अलावा 21 में से चार महिला विधायक डॉक्टरेट हैं।
सोर्स : विधानसभा वेबसाइट और पीआरएस वेबसाइट। डेटा 8 फरवरी तक का। गृहिणी या डॉक्टर मुद्दा बेझिझक उठाती हैं 15वीं विधानसभा में सिर्फ एक महिला विधायक ऐसी रही जिन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा। बाकी सभी महिला विधायकों ने औसतन 101 सवाल पूछे। दूसरी ओर 16वीं विधानसभा में हर महिला विधायक ने औसतन कम से कम 5 सवाल पूछे। दूसरी ओर सवालों के प्रकार पर नजर डालें तो महिला विधायकों ने ट्रांसपोर्ट और आर्ट एंड कल्चर से लेकर शिक्षा और साइबर अपराध पर सवाल किए हैं। 16वीं विधानसभा में सभी सत्रों में महिलाओं ने सबसे अधिक सहकारिता और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति पर सवाल पूछे। शिमला देवी बताती हैं, महिला विधायकों की पृष्ठभूमि कुछ भी हो लेकिन सदन में उनकी कोशिशें दिखाई देती हैं। कोई कम शिक्षित हो या डॉक्टर हो वे हर तरह के मुद्दों पर बेझिझक बाेलती हैं। सुशीला डूडी एक गृहिणी हैं। “अब महिलाएं नीति निर्माण पर बात नहीं करती थी। अब वे पॉलिसी मेकिंग, फाइनेंस, टेक्निकल इश्यूज को भी उठा रही हैं। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल से भी उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।” -अनीता बधेल, विधायक “महिलाएं अब सिर्फ अपने क्षेत्र के नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के सवाल पूछती हैं। कोई सवाल पूछे तो मजबूती से जवाब देती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की उपस्थिति ज्यादा रहती है। उन्हें गंभीरता से लिया जाता है।” – गीता बरवड़, विधायक


