कपिल कुमार | जालंधर शहर के दो सबसे व्यस्त और प्रमुख इलाकों- मॉडल टाउन और कैंट के निवासियों व कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पावरकॉम इन दोनों इलाकों की पूरी बिजली व्यवस्था को अपग्रेड करने जा रहा है। 19 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी, जर्जर तारें बदली जाएंगी और फीडरों का लोड विभाजित किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को ओवरलोडिंग, लो-वोल्टेज और बार-बार होने वाले बिजली कटों से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी। पावरकॉम ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिस भी एजेंसी को यह काम सौंपा जाएगा, उसे इसे 18 महीने की समय-सीमा के भीतर पूरा करना होगा। कंगनीवाल इंडस्ट्रियल एरिया में ओवरलोडिंग और लोकल फॉल्ट के कारण लगातार बिजली कटती थी, जिससे 200 से अधिक फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित होता था। इस गंभीर समस्या को दूर करने को पावरकॉम ने चौगिट्टी के 66 केवी सबस्टेशन से एक नया और अलग फीडर चालू कर दिया है। अब इंडस्ट्रियल एरिया को बिना किसी रुकावट के लगातार बिजली मिलेगी। इससे न केवल ट्रिपिंग की समस्या खत्म हुई है, बल्कि फैक्ट्रियों में उत्पादन बेहतर होगा और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान भी नहीं होगा। मॉडल टाउन: कमर्शियल हब और घरों में लोड होगा संतुलित मॉडल टाउन डिवीजन में लगभग 40 हजार उपभोक्ता हैं। भीषण गर्मी के दिनों में कमर्शियल हब और रिहायशी इलाकों में एसी का लोड अचानक बढ़ने से अक्सर ट्रांसफार्मर ट्रिप हो जाते हैं और लोकल फॉल्ट के कारण लोगों को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ती है। समाधान: ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जाएगी और नए डीटीआर (डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर) स्थापित किए जाएंगे। कमर्शियल और घरेलू लोड को संतुलित करने के लिए अलग-अलग फीडर बनाए जाएंगे। पुरानी और जर्जर नंगी तारों को हटाकर सुरक्षित एरियल बंच (एबी) केबल बिछाई जाएगी। कैंट क्षेत्र: आंधी-तूफान में भी नहीं गुल होगी बत्ती कैंट इलाके में मामूली आंधी-तूफान आते ही पुरानी व नंगी तारों के आपस में टकराने से घंटों बिजली गुल हो जाती है। समाधान: जोखिम भरी ओवरहेड लाइनों को पूरी तरह इंसुलेटेड एबी केबल में बदला जाएगा, जिससे शॉर्ट-सर्किट की समस्या खत्म होगी। लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए नए सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही कैंट के ग्रामीण और शहरी इलाकों के फीडरों को भी पूरी तरह अलग-अलग किया जाएगा।


