छत्तीसगढ़ के सेमरा सी गांव में अनोखी परंपरा:एक सप्ताह पहले मनाई गई होली, ग्रामीणों ने निभाई सदियों से चली आ रही परंपरा

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतिम छोर पर बसे सेमरा सी गांव में एक अनूठी परंपरा के तहत होली का त्योहार एक सप्ताह पहले मनाया गया। ग्रामीणों का मानना है कि यह परंपरा श्री सिरदार देव के आदेश पर आधारित है और इसे निभाना गांव की समृद्धि और सुख-शांति के लिए आवश्यक है। चार प्रमुख त्योहार समय से पहले मनाना अनिवार्य गांव में हरेली, तीज पोरा, दीवाली और होली जैसे चार प्रमुख त्योहारों को निर्धारित तिथि से एक सप्ताह पहले मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। ग्रामीणों की मान्यता है कि यदि यह परंपरा नहीं निभाई जाती, तो गांव में विपदाएं आ सकती हैं। श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई होली रविवार को गांव के श्री सिरदार देव मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होली का पर्व शुरू हुआ। इससे एक दिन पहले रात्रि में होलिका दहन किया गया। पूजा के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। गांव में नगाड़ों और डीजे की धुन पर युवा और बुजुर्ग झूमते नजर आए। इस त्योहार को देखने और मनाने के लिए आसपास के गांवों के लोग भी सेमरा सी पहुंचते हैं। वहीं, घरों में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है और छत्तीसगढ़ी पकवानों की खुशबू पूरे गांव में फैल जाती है। गांव के बुजुर्गों की मान्यता, सिरदार देव के आदेश से शुरू हुई परंपरा गांव के बुजुर्ग चैतू राम सिन्हा (99) ने बताया कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। पहले यह गांव घने जंगलों के बीच बसा था, जहां कुछ ही लोग निवास करते थे। धीरे-धीरे यहां बसाहट बढ़ी और तब से सिरदार देव के आदेश के अनुसार चार त्योहारों को पहले मनाने की परंपरा शुरू हुई। उनका कहना है कि यदि यह परंपरा न निभाई जाए, तो गांव में आपदाएं आ सकती हैं। कुछ साल पहले दीपावली समय से पहले नहीं मनाई गई थी, जिसके बाद गांव में आगजनी की घटना हो गई। तब से ग्रामीण और भी सख्ती से इस परंपरा का पालन करने लगे। गांव की युवतियों ने बताया, दूसरे स्थानों पर होली फीकी लगती है गांव की युवतियों ने बताया कि होली के दिन सबसे पहले मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है, इसके बाद घरों में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाए जाते हैं। हर घर में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है। होली सप्ताहभर पहले मनाने के बाद जब वे दूसरे स्थानों पर जाकर होली खेलते हैं, तो उन्हें वह फीकी लगती है क्योंकि अपने गांव की परंपरा और उल्लास से भरी होली की बात ही अलग होती है। पारंपरिक अंदाज में होली का उत्सव ग्रामीणों ने बताया कि हर साल परंपरागत तरीके से नगाड़ों की थाप पर गीत गाते हुए पूरे गांव की परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा ग्राम देवता श्री सिरदार देव के मंदिर तक पहुंचती है, जहां होली का समापन होता है। ग्रामीणों का विश्वास है कि श्री सिरदार देव उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं, इसलिए वे श्रद्धा और भक्ति के साथ इस परंपरा का निर्वहन करते हैं। गांव की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बनी परंपरा यह अनूठी परंपरा सेमरा सी गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। ग्रामीणों का मानना है कि सिरदार देव की कृपा से ही गांव में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है। यही वजह है कि पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *