जाली प्रमाणपत्र पर नौकरी पाने का आरोपी 32 साल बाद साक्ष्य के अभाव में कोर्ट से हो गया बरी

जाली कागजात पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के मामले में ट्रायल फेस कर रहा आरोपी बिहार के रोहतास जिला निवासी शैलेंद्र सिंह उर्फ सुरेंद्र सिंह (68) को 32 साल बाद एसीबी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार सिंह की अदालत ने बुधवार को बरी कर दिया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) इस मामले में सबूत नहीं जुटा पाई। जिसका लाभ आरोपी को मिला। बचाव पक्ष के वकील विजय लक्ष्मी श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि शैलेंद्र सिंह पर 28 साल की उम्र में जाली प्रमाणपत्र पर रोहतास के राजकीय औषधालय गोड़ारो में फरवरी 1984 को योगदान देने का आरोप था। इतना ही नहीं, नौकरी में आने के बाद उस पर कई लोगों को जाली बहाली करवाने का भी आरोप था। मामले में शैलेंद्र सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कैबिनेट (निगरानी) के निर्देश पर निगरानी के तत्कालीन एसपी ब्रज नंदन प्रसाद सिंह ने पीई दर्ज की थी। इसी शिकायत पर 28 मार्च 1992 को प्राथमिकी (कांड संख्या 18/92) दर्ज की गई थी। प्राथमिकी के पहले ही आरोपी ने नौकरी छोड़ दी थी।

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