श्रीमहावीरजी में आयोजित अंतरराज्यीय मीणा महापंचायत में रोसीं-करीरी प्रकरण का समाधान कर दिया गया। मीन भगवान मंदिर में हुई इस महापंचायत में सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी गई। पूर्व आईएएस अधिकारी पी.आर. मीणा की अध्यक्षता में हुई इस पंचायत में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। रोसीं का निष्कासन रद्द कर दिया गया। साथ ही पूर्व में निष्कासित पंच-पटेलों को भी समाज की मुख्यधारा में वापस शामिल करने का फैसला लिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस पंचायत में देशभर से पंच-पटेल और समाज के गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गोवा के पूर्व डीजीपी मुकेश मीणा ने समाज में एकता बनाए रखने के सुझाव दिए। महापंचायत में 51 सदस्यीय न्याय समिति का गठन किया गया। इस प्रकरण में लगाया गया 11 लाख का जुर्माना रोसीं और उसके चार गांवों को सौंप दिया गया। महापंचायत ने यह भी तय किया कि अब इस विषय पर न तो कोई नई पंचायत होगी और न ही सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी की जाएगी। राष्ट्रीय आदिवासी मीणा महासभा के युवा नेता नरेंद्र दनालपुर के नेतृत्व में कार्यक्रम की व्यवस्थाएं की गईं। इस ऐतिहासिक निर्णय से समाज में सद्भावना और एकता को बल मिलने की उम्मीद है। यह था मामला करौली में 18 जनवरी को स्टेशन मास्टर युवक के भाई की मूंछ-बाल काटने वालों पर महापंचायत ने 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही दो बिचौलियों पर भी एक-एक लाख रुपए का दंड लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर पूरे गांव को समाज से बहिष्कृत करने की चेतावनी दी गई। दरअसल, सगाई की रस्म से ऐन वक्त पहले शादी से इनकार करना लड़की के परिवार को नागवार गुजरा था। लड़की पक्ष की ओर से स्टेशन मास्टर युवक के परिवार को बंधक बना लिया था। मारपीट के साथ स्टेशन मास्टर युवक के भाई की मूंछ-बाल भी काट दिए थे। नादौती थाना क्षेत्र में हुई इस घटना का वीडियो भी सामने आया था।


