लुधियाना। निगम चुनाव को लेकर लगे कोड ऑफ कंडक्ट के बीच नगर निगम अफसरों ने रोजगार्डन नवीनीकरण के 8.8 करोड़ के टेंडर की टेक्निकल बिड खोल दी। आरोप है कि एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए यह खेल रचा गया है। निगम अफसरों की इस कारगुजारी की शिकायत स्टेट इलेक्शन कमीशन से की गई है। नगर निगम ने रोजगार्डन नवीनीकरण के लिए 8.8 करोड़ का बजट मंजूर किया था। इसके लिए 7 दिसंबर को टेंडर कॉल किए गए थे। नगर निगम व नगर कौंसिल चुनाव के चलते 7 दिसंबर से नगर निगम क्षेत्र में कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो गया। निगम प्रबंधन ने टेंडर सबमिट की तारीख बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी थी। इस बीच नगर निगम प्रबंधन ने 13 दिसंबर को ही इस टेंडर की टेक्निकल बिड खोल दी। ठेकेदारों के एक ग्रुप ने निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल को शिकायत की। आरोप है कि कमिश्नर ने विधिक राय लेने की बात कही लेकिन मामला गंभीर होने पर ठेकेदारों ने स्टेट इलेक्शन कमीशन पंजाब को इसकी शिकायत की। सूत्रों की मानें तो टेंडर अलॉटमेंट करवाने के इस पूरे खेल में कमीशन का खेल भी हो सकता है। क्योंकि ऐसा पहली बार होगा कि किसी टेंडर के प्रोसेस को लेकर निगम अफसरों ने मनमर्जी की और टेक्निकल बिड को खोल दिया। भाजपा नेता दीपू शर्मा ने कहा कि निगम अफसरों द्वारा किसी को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल रचा गया है जिसकी शिकायत की गई और मामले की तह तक जांच की जानी जरूरी है। मामले में निगम अफसरों के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। नगर निगम ने रोज गार्डन को अपग्रेड करने की योजना बनाई थी। कुल खर्च 8.80 करोड़ रुपए इसमें खर्च होने थे। 7 दिसंबर को कोड ऑफ कंडक्ट लग गया। निगम द्वारा पंजाब सरकार की वेबसाइट पर टेंडर प्रक्रिया को लेकर सूचना अपडेट की गई थी जिसमें यह बताया था कि इस टेंडर के लिए अब बिड 31 दिसंबर तक की जा सकेगी। 12 दिसंबर को इस कोरीजेंडम को हटाकर इस टेंडर की बिड सबमिट को लेकर तारीख में बदलाव किया गया। तीन ठेकेदारों ने इस कांट्रेक्ट को लेने के लिए आवेदन किया। 13 दिसंबर की दोपहर की टेंडर की टेक्निकल बिड खोल दी गई। जानकारों की मानें तो चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल रचा गया ताकि कोई और ठेकेदार बिड न डाल सके। चोरी हुई फाइल में ये था निगम जोन-ए की बिल्डिंग ब्रांच ने दर्शन लाल बवेजा की इमारत का नक्शा बेसमेंट समेत दो ही फ्लोर का पास किया था, लेकिन मौके पर इमारत 7 मंजिला बन चुकी है। इसी के तहत जब मामला उजागर हुआ तो इस इमारत को लेकर कार्रवाई शुरू हुई और फाइल में 5 साल के दौरान हुई सीलिंग की कार्रवाई, इस पर लिए गए एक्शन, जारी हुए नोटिस, हाईकोर्ट में मामला पहुंचने और विजिलेंट में मामला पहुंचने से लेकर जारी हुए नोटिसों के जवाब, हाईकोर्ट में चल रहे केस का पूरा रिकार्ड और इमारत को कब-कब कैसे नियमों के अनुसार मंजूरी दी और उसके बाद किस-किस तरह से वहां अवहेलना हुई थी। ऐसी तमाम जानकारियों का पूरा रिकार्ड चोरी हुई 6 फाइलों में दर्ज था। जबकि आगामी दिनों में ही हाईकोर्ट में इस मामले को सुनवाई है। पहले 9 दिसंबर को खुलना था टेंडर नगर निगम कमिश्नर ऑफिस से ही फाइल गुम होने का मामला सामने आया है, जिसके बाद निगम में तैनात एडिश्नल कमिश्नर परमदीप सिंह ने अज्ञात के खिलाफ चोरी की एफआईआर थाना डिवीजन नंबर-5 में दर्ज करवाई है। बता दें कि चांद सिनेमा निकट गांधी मार्केट के पास फतेहगढ़ मोहल्ला मेन जीटी रोड पर दर्शन लाल बवेजा ने एक इमारत बनाई है, जो पिछले 5 साल से विवादों में चल रही है और निगम कमिश्नर दफ्तर से इसी इमारत से संबंधित 6 फाइलें अचानक से गायब हो गई हैं। एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच करेगी और यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि फाइल चोरी होने के पीछे क्या कारण हैं, क्या यह कोई गलती थी या जानबूझकर किया गया कोई अपराध है। बता दें कि दर्शन लाल बवेजा की गांधी नगर में 300 गज में इमारत है। इसका निर्माण 2018 में शुरू हुआ था। 2020 में इमारत के निर्माण में नियमों की जमकर अवहेलना होने के बाद विवाद शुरू हो गया। इमारत चार से पांच बार सील हो चुकी है। इसके बावजूद वहां पर 7वीं मंजिल भी बनकर तैयार हो गई है। हालांकि इस इमारत का निर्माण कार्य रूकवाने को एक साल पहले अधिकारियों ने पुलिस बल भी तैनात किया था, लेकिन पुलिस के सामने ही 7वीं मंजिल बनकर तैयार हो गई थी। जबकि इस इमारत को लेकर मामला विजिलेंस और हाईकोर्ट में विचाराधीन है। तीसरी आंख खोलेगी फाइल चोरी का राज निगम कमिश्नर के दफ्तर की एंट्री से लेकर एग्जिट होने तक की पूरी रिकार्डिंग सीसीटीवी के जरिए होती है। निगम कमिश्नर के मेन एंट्री से दाखिल होने के बाद अंदर दफ्तर के गेट तक जाने और बाहर आने वाले हर व्यक्ति पर सीसीटीवी से नजर रहती है। वहीं, एडिशनल कमिश्नर ने पुलिस में दर्ज करवाई शिकायत में ये बताया है कि दर्शन लाल बवेजा की इमारत संबंधी 6 फाइलों को 10 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन एटीपी मदनजीत सिंह बेदी की अगुवाई में निगम कमिश्नर के दफ्तर में तैनात कर्मचारी हरदेव सिंह को दी गई थी, जो अभी तक नहीं मिली रही हैं। सूत्रों की मानें तो एटीपी ने फाइल को निगम कमिश्नर के पीए को सौंपी थी, जिनकी तरफ से आगे फाइलों को कर्मचारी हरदेव सिंह को सौंपा और उन्हें निगम कमिश्नर के ऑफिस के टेबल पर रखवा दिया था। इसके बाद अब फाइलें कहां गई हैं, ये बड़ा राज बन चुका है। जबकि सूत्रों से ये भी पता चला है कि निगम कमिश्नर के टेबल से फाइलें आगे निगम कमिश्नर की गाड़ी तक भी पहुंची हैं। लेकिन इन सब बातों की सच्चाई सिर्फ और सिर्फ सीसीटीवी के जरिए ही सामने आएगी। जबकि थाना डिवीजन नंबर-5 की पुलिस ने सीसीटीवी को लेकर भी जांच शुरू कर दी है।


