आरयूएचएस में इलाज की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। मुख्यमंत्री ने 5 माह पहले यहां पर दौरा कर यहां पर व्यवस्थाएं सुधारने को कहा था। इसके बाद एसएमएस के डॉक्टर्स लगाए दिए गए, मगर यहां से पेशेंट रेफर होना बंद नहीं हो रहे। ओपीडी समय के अलावा दोपहर 3 बजे बाद यहां केवल एक जिला स्तर की सुविधाएं मिलती है। नतीजतन यहां से 80% मरीजों को एसएमएस रेफर कर दिया जाता है। आरयूएचएस में 5 महीने में सरकार की ओर से किए गए बदलाव, पहले की स्थिति और वर्तमान हालात पर रिपोर्ट…। आरयूएचएस में एसएमएस के डॉक्टर्स लगाने के बाद ओपीडी में बेहद बढ़ोतरी हुई है। छह महीने पहले जो ओपीडी अधिकतम 500 तक होती थी, वह अब बढ़कर 1300 तक पहुंच गई है। साथ ही ट्रॉमा और इमरजेंसी केस भी बढ़कर दोगुना तक हो गए और ओपीडी समय के अलावा 350 तक पेशेंट आरयूएचएस पहुंच रहे हैं। लेकिन अभी सामान्य ब्लड की ही जांच हो रही है। कल्चर जांच व अन्य जांच के लिए एसएमएस ही विकल्प है। साथ ही गैस्ट्रो, नेफ्रो और कार्डियो की भी जांच यहां नहीं होती। स्थायी हल नहीं, चिकित्सकों की भर्ती करना जरूरी भले ही सरकार ने कार्य व्यवस्था के तहत एसएमएस के डॉक्टर्स को आरयूएचएस में लगा दिया हो, लेकिन यह स्थायी हल नहीं है। ऐसे में अब सरकार को आरयूएचएस के लिए भर्ती ही अंतिम विकल्प है। अब सरकार ने सहायक आचार्य के 69, सुपर स्पेशलिटी के 9 एसोसिएट प्रोफेसर (सुपर स्पेशिलिटी) की भर्ती के लिए आवेदन निकाले हैं। साथ ही अशैक्षणिक श्रेणी के 441 पदों में से जिनकी भर्ती विश्वविद्यालय के स्तर पर होंगी। 70%खाली है भवन आरयूएचएस का 70% भवन खाली है, यहां हर तरह की जांच मशीन, लैब, बेड और अन्य सुविधाएं हैं। स्टाफ नहीं होने से सुविधाओं का साढ़े 3 साल से उपयोग नहीं हो रहा। हालांकि कोशिशें की गईं, लेकिन डॉक्टर्स सहित नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य स्टाफ की कमी रही और मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया। यहां बी12, बी3 सहित कई जांचें होती ही नहीं आरयूएचएस ओपीडी 1300 से अधिक और आईपीडी भी करीब 100 तक हुई। इमरजेंसी और ट्रॉमा केस बढ़कर 350 तक हुए। रोजाना 80 से अधिक केस रेफर होते हैं। कार्डियो, न्यूरो, नेफ्रो, गेस्ट्रो, ईएनटी की 5 फीसदी ही जांच होती हैं। अन्य के लिए रेफर किया जाता है।


