मंदिरहसौद से 19 दिन पहले गायब युवक के परिजन पहले उसकी खाेजबीन करते भटकते रहे। जब शव के नाम पर कंकाल मिला तो अब उसका पोस्टमार्टम करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। हालांकि परिजनों ने युवक के गायब होने के तीसरे दिन ही थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। उसके बाद से वे खुद तलाश करने के साथ-साथ थाने के चक्कर काट रहे थे। 11 दिन बाद पुलिस को अज्ञात शव के अवशेष मिले। लेकिन पुलिस ने उन्हें जानकारी नहीं दी। भास्कर को नाबालिग मृतक के मामा ने सुनाई अपनी पीड़ा… मैं लेखराम साहू। रायपुर में कुरियर सर्विस कंपनी में काम करता हूं। मेरे घर में मेरी बहन, उसकी दो बेटी और दो बेटे साथ ही रहते हैं। बहनोई अलग रहता है। एक भांजी खिलेश्वरी और सबसे छोटा भांजा धनेंद्र रायपुर में काम करते हैं। धनेंद्र आरंग के पास लखौली में जेसीबी में हेल्परी का काम करता था। 19 फरवरी को भांजी और भांजा दोनों रायपुर से मेरे पैतृक निवास बागबहारा के बिहाझर गांव जाने के लिए निकले थे। दोपहर करीब ढाई बजे धनेंद्र मंदिरहसौद के लखौली बस स्टैंड के पास उतर गया। अपनी बहन से कहा कि तुम जाओ मैं आ जाउंगा। वह रात तक घर नहीं पहुंचा। मैंने उसे फोन किया। फोन बंद आया। उसका काम चूंकि वहीं चलता था, हमें लगा कल आ जाएगा। लेकिन अगले दिन भी नहीं आया। उसका फोन बंद ही था। हमने उसके दोस्तों, अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया। लेकिन वह कहीं नहीं मिला। इसके बाद हम लखौली आए, जहां उसका काम चलता था। भांजा वहां भी नहीं मिला। अगले दिन हम आरंग थाने पहुंचे। यहां गुमशुदगी कि रिपोर्ट लिखवाई। 5 मार्च को हम फिर थाने आए, पुलिस ने कुछ नहीं बताया। तीन दिन बाद फिर थाने गए, एक घंटे बिठाने के बाद हमें पुलिस ने बताया कि एक लावारिश लाश मिली है। उसकी फोटो दिखाई, धनेंद्र की बहन ने उसके कपड़ों और जूतों पहचान लिया। पुलिस वालों ने कहा कि शनिवार और रविवार छुट्टी है, सोमवार को अंबेडकर अस्पताल जाना और बोलना कि हम परिजन हैं, लाश दे देंगे। सोमवार सुबह अंबेडकर अस्पताल आए। यहां डॉक्टर सोनवानी से मिले। लेकिन उन्होंने यह कह दिया कि अभी किसी भी तरह की जांच या पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। इसलिए कुछ दिन बाद आना। अब हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि हम अपने भांजे की मौत का शोक मनाएं या अस्पताल और थाने के चक्कर कांटे। मेरी बहन का रो रोकर बुरा हाल हो गया है। इधर, अस्पताल में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर नागेंद्र सोनवानी ने बताया कि अस्पताल में बोरे में भरकर हड्डियां और कुछ कपड़े आए थे। सड़ी-गली हड्डी में चमड़ी चिपकी रहती है, हमें उसकी उम्र, वह महिला है या पुरुष, उसके शरीर में चोट के निशान मरने के पहले थे या बाद में आए, यह सब जानने के लिए समय लगता है। उसके परिजन आए थे हमने उन्हें यह बात समझाई है। कुछ दिनो बाद ही रिपोर्ट मिल पाएगा।


