भास्कर न्यूज |जामताड़ा पाक महीने रमजान का 18वां रोजा बुधवार को मुकम्मल हुआ। पूरे जिले में रोजेदारों ने अल्लाह की इबादत में अपना दिन गुजारा और शाम को इफ्तार के वक्त रोजा खोला। इस मौके पर मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गई और कुरआन की तिलावत की गई। इस दौरान स्थानीय मस्जिदों में मौलानाओं ने रोजे के महत्व पर रौशनी डालते हुए कहा कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम और अल्लाह के करीब जाने का जरिया है। मदरसा मिस्बाह लील बनात के नाजिम हाफिज नाजिर हुसैन ने बताया कि रोजा रखने वालों के लिए अल्लाह ने विशेष इनाम मुकर्रर किए हैं। उन्होंने कहा कि रमजान में हर नेकी का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। रोजेदारों के लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। रोजेदार के मुंह की खुशबू अल्लाह को इतनी पसंद होती है कि वह उसे मुश्क से भी बेहतर करार देता है। हाफिज नाजिर ने कहा कि रोजा सिर्फ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि बुरी आदतों से दूर रहने और नेक काम करने का एक तरीका है। रोजा इंसान के सब्र, सहनशीलता और आत्मसंयम की परीक्षा लेता है और उसे हर बुराई से बचने की सीख देता है। मस्जिदों-घरों में इफ्तार और सेहरी का खास इंतजाम रमजान के इस पाक महीने में मस्जिदों और घरों में इफ्तार और सेहरी का खास इंतजाम किया गया है । रोजेदारों ने खजूर, फल, शरबत और विभिन्न पकवानों से इफ्तार किया। कई स्थानों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।


