राज्य के 1.59 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हेल्थ कार्ड बन गया है। 12 मार्च 2025 तक 1.62 लाख नियमित राज्यकर्मियों में से केवल 2000 लोगों का ही हेल्थ कार्ड बना था। दैनिक भास्कर ने 14 मार्च के अंक में प्रकाशित किया था कि 1.60 लाख कर्मियों का हेल्थ कार्ड बना नहीं, स्वास्थ्य प्रतिपूर्ति की सुविधा भी बंद। इसके बाद राज्य सरकार की इकाई और बीमा कंपनी ने सोमवार से शुक्रवार तक 1.57 लाख कर्मियों का हेल्थ कार्ड तैयार करा दिया। करीब 3000 वैसे कर्मियों का ही हेल्थ कार्ड नहीं बन है, जिनकी जीपीएफ नंबर में विसंगतियां हैं। खबर छपने के बाद वित्त विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए राज्यकर्मियों के जीपीएफ नंबर के आधार पर हेल्थ कार्ड बना दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने शेष बचे कर्मियों का भी जल्द से हेल्थ कार्ड बनवाने का निर्देश झारखंड आरोग्य सोसाइटी को दिया है। मालूम हो कि राज्य सरकार ने एक मार्च 2025 से 1.62 लाख राज्यकर्मियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की है। इसके तहत कर्मी और उनके परिजनों का 5 लाख रुपए तक के कैशलेस इलाज और जरूरत पड़ने पर राज्य आरोग्य सोसाइटी के माध्यम से आगे इलाज की अनलिमिटेड सुविधा भी मिलेगी। योजना लागू होने के बाद राज्य सरकार ने पहले से चल रही मेडिकल रिम्बर्समेंट (प्रतिपूर्ति) की सुविधा को बंद कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी कर ऐसे किसी भी भुगतान पर रोक लगा दी है। इलाज कराने के लिए मेडिकल एडवांस की व्यवस्था बंद हो गई है। कर्मचारियों का हेल्थ कार्ड नहीं रहने से कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने में परेशानी हो रही थी। राज्य सरकार ने टाटा एआईजी बीमा कंपनी को इलाज संबंधी दायित्व दे रखा है। बीमा कंपनी के तैयार पैनल में राज्य के कई सरकारी और निजी बड़े अस्पताल नहीं रहने के कारण वहां इलाज कराने पर कैशलेस की सुविधा नहीं मिल पा रही है। राज्य आरोग्य सोसाइटी ने इस समस्या के समाधान के लिए बीमा कंपनी को कदम उठाने को कहा है। 14 मार्च को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर।


