चौपारण चतरा मोड़ से झारखंड-बिहार बॉर्डर चोरदाहा तक जीटी रोड का 13-14 किमी हिस्सा बीते 15 सालों से ऐक्सिडेंटल ज़ोन के रूप में जाना जाता है। यहां आए दिन हादसे होते हैं। बीते 15 वर्षों में हजारों दुर्घटनाएं हुईं। इनमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों दिव्यांग हो गए हैं। जीटी रोड को फोर लेन से सिक्स लेन में बदले जाने के बाद हादसों में और इजाफा हुआ है। तेज रफ्तार वाहन, धीमी गति से चल रहा निर्माण कार्य और सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हादसों की बड़ी वजह बने हैं। घायलों को समय पर इलाज नहीं मिलने से कई की जान चली जाती है। सरकार ने सामुदायिक अस्पताल में बड़े भवन तो बना दिए, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी सुविधाएं तक नहीं हैं। गंभीर रूप से घायलों को रेफर कर दिया जाता है। एनएचएआई की ओर से एंबुलेंस सेवा दी गई है, लेकिन यह सिर्फ अस्पताल तक ही मरीजों को पहुंचा पाती है। हजारीबाग या अन्य बड़े अस्पतालों तक ले जाने की सुविधा नहीं है। सामुदायिक अस्पताल की 108 एंबुलेंस बीते कई महीनों से खराब पड़ी है। इसे ठीक करने की कोई पहल नहीं हुई। ऐसे में बड़ी दुर्घटनाओं के बाद घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और कई की जान चली जाती है। जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने अब तक दनुआ घाटी को ऐक्सिडेंटल ज़ोन के रूप में चिन्हित नहीं किया है। इससे हादसों के बाद राहत और बचाव कार्य में देरी होती है। सांसद मनीष जायसवाल ने दनुआ घाटी को ब्लैक स्पॉट घोषित करने की मांग केंद्र सरकार से की है। बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने जीटी रोड पर हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए बरही और धनबाद में ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग की है। विधायक ने विधानसभा में चौपारण के सामुदायिक अस्पताल में विशेष चिकित्सा सुविधा देने की मांग उठाई। उन्होंने खराब पड़ी 108 एंबुलेंस का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा। कहा कि एंबुलेंस सेवा सुचारू रूप से नहीं चल रही। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग की। इस पर सरकार ने संज्ञान लिया है।


