राज्य के बिल्डरों को अगले माह से झारेरा (झारखंड रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) को उपलब्ध कराए गए समय सीमा में ही अपना प्रोजेक्ट पूरा करना पड़ेगा। उन्हें वर्तमान की तरह प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कोई भी एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा। झारेरा टाइम फ्रेम में संशोधन की तैयारी कर रहा है। संभवत: अप्रैल से यह लागू हो जाए। संसोधन के तहत प्रोजेक्ट के निबंधन के समय बिल्डर जो समय सीमा तय करेंगे, उसी में उसे पूरा करना होगा। झारेरा की ओर से बुधवार को रेडिशन ब्लू होटल में हितधारकों के क्षमता निर्माण पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में संशोधन पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा बिल्डर्स को निगम के साथ-साथ रेरा में भी निबंधन अनिवार्य होगा। साथ ही आर्किटेक्ट्स और सीए का भी रेरा में निबंधन कराना होगा। सोमवार को यह जानकारी देते हुए झारेरा चेयरमैन वीरेंद्र भूषण व झारखंड विधि सलाहकार आरके चौधरी ने सभी स्टेकहोल्डर्स से कार्यशाला में आने का अनुरोध किया है। कई बिल्डरों ने वेबसाइट पर क्वार्टरली रिपोर्ट जमा नहीं किया झारखंड भू-संपदा(विनिमय व विकास) नियमावली 2017 के अनुसार झारेरा में निबंधित सभी प्रोजेक्ट्स का क्वार्टरली रिपोर्ट बिल्डर द्वारा झारेरा की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य है। लेकिन कई बिल्डरों ने अपलोड नहीं किया है। इनका झारेरा न्यायालय में वाद लंबित है। झारेरा न्यायालय ने 11 बिल्डरों के विरुद्ध 25000 रुपए प्रति क्वार्टर की दर से 5,50,000 रुपए और एक बिल्डर के विरुद्ध एक क्वार्टर का 25000 रुपए हर्जाना लगाया गया है और 16 बिल्डरों के बैंक खाते को फ्रीज किया गया है। 6 बिल्डरों ने खर्च की राशि जमा कर दी है। नया फॉर्मेट में गलत जानकारी नहीं दे सकेंगे इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स और सीए वर्तमान में बिल्डर प्रत्येक तिमाही में फाइल अपडेट करते हैं, लेकिन अप्रैल से उन्हें रेरा द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले प्रोपर फॉर्मेट में फाइल अपडेड करना होगा। इसके लिए झारेरा ने एक फार्मेट डिजाइन किया है। यह बताते हुए विधि सलाहकार आरके चौधरी ने बताया कि यह फॉर्मेट इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स और सीए तीनों के लिए अलग-अलग होगा। इसमें कोई गलत जानकारी देने की गुंजाइश नहीं रहेगी।


