पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी) में दौसा जिले के मोरेल, सैथल सागर, कालाखो व माधोसागर बांध को शामिल किया गया है, लेकिन जिले के अन्य बांधों को भी परियोजना में शामिल करने की मांग को लेकर लोग लामबंद हो रहे हैं। इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी उभरने लगे हैं। ताजा मामला सिकराय उपखण्ड के भंडारी बांध क्षेत्र का है, जहां के किसानों ने गुरूवार को नारेबाजी करते हुए विरोध जताया और बांध को ईआरसीपी में शामिल करने की मांग की। किसानों का कहना है कि भंडारी बांध के आसपास दर्जनों गांवों का भूजल स्तर गिरने से बोरवेल सूख गए हैं। सिंचाई के लिए पानी की कमी होने से फसलें नहीं हो पा रही। किसान अब वर्षा आधारित फसलों पर ही निर्भर है, ऐसे में किसानों को खेती से फायदे की बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि बांध को नहर परियोजना से जोड़ दिया जाए तो सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने से पूरा इलाका फिर से सरसब्ज हो सकता है। इसके लिए क्षेत्र के किसान पूरी तरह एकजुट हैं। किसानों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांग को पूरा नहीं किया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान गिर्राज डोलिका, मोतीलाल धांगला, नवलकिशोर सैहणा, रामखिलाडी कुम्हार, रामदयाल सैन, रामस्वरूप गुर्जर, लक्ष्मीनारायण गुर्जर, रतनलाल गुर्जर, विक्रम, कैलाश गुर्जर, दीपचंद बैरवा, किशनलाल मीणा, रामफूल बैरवा समेत दर्जनों किसान मौजूद रहे।


