नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोंडागांव में विशेष पहल:ITBP के जवानों ने ग्रामीणों को जरुरी सामान बांटा; विश्व क्षय दिवस पर 8000 मरीजों की जांच हुई

कोंडागांव के छोटेडोंगर में ITBP के जवानों ने सिविक एक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसके तहत ग्रामीणों को कपड़े, खाद्य सामग्री, स्कूल बैग और अन्य जरूरी सामान बाटें। उन्होंने ग्रामीणों को किसी भी मदद के लिए सुरक्षा बलों से संपर्क करने का आमंत्रण दिया। वहीं, जिले में विश्व क्षय दिवस के अवसर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। मंगलवार को अभियान के तहत शासकीय नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल की छात्राओं को टीबी रोग के लक्षण, जांच और उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई और 8000 मरीजों की जांच की गई। ITBP का सिविक एक्शन कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र छोटेडोंगर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (बीएसएफ) की 29वीं वाहिनी ने महत्वपूर्ण पहल की। सिविक एक्शन कार्यक्रम में बडगई, बाकेर, तुरेमेटा, बिंजार और बेताल गांवों के करीब 300 ग्रामीण शामिल हुए। बीएसएफ के कमांडेंट दुश्यंत राज जायसवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि बीएसएफ हमेशा जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए तैयार है। स्थानीय स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह को और भी रंगीन बना दिया। युवाओं को पुलिस में भर्ती की जानकारी दी कार्यक्रम में युवाओं को विशेष ध्यान दिया गया। उन्हें भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और पुलिस में भर्ती की जानकारी दी गई। साथ ही लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी के टिप्स भी दिए गए। सीआरपीएफ छोटेडोंगर की टीम ने भी कार्यक्रम में सहयोग किया। आयोजन के अंत में सभी ग्रामीणों के लिए भोजन और जलपान की व्यवस्था की गई। यह कार्यक्रम ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास बढ़ाने में सफल रहा। विश्व क्षय दिवस पर जागरूकता अभियान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. सिंह के नेतृत्व में विश्व क्षय दिवस के अवसर पर जिला अस्पताल और पांचों विकासखंडों में विशेष जांच कार्यक्रम आयोजित किए गए। 100 दिवसीय निक्षय निरामय अभियान के दूसरे चरण में अब तक 8000 संभावित मरीजों की जांच की गई है। कांतेश देवांगन के मुताबिक, इनमें से 170 लोग टीबी पॉजिटिव पाए गए हैं। सभी मरीजों का श्रेणीवार इलाज चल रहा है। विश्व क्षय दिवस पर जिला अस्पताल और सभी विकासखंडों में 35 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भी CYTB पद्धति से जांच की गई। यह जांच प्रशिक्षित मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ नर्स की देखरेख में की गई। कार्यक्रम में डॉट्स तकनीशियन, नर्सिंग स्कूल की प्राचार्या, शिक्षिकाएं और छात्राएं मौजूद रहीं। टीबी उन्मूलन के लिए जन-जागरूकता अभियान, निबंध प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी आयोजित की गईं।

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