12वीं के बच्चों और माता-पिता के बीच करियर विकल्पों को लेकर उलझन की स्थिति देखने को मिल रही है। इस तनाव के कारण बच्चों की मानसिक स्थिति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। नींद न आना, मानसिक थकान और भविष्य की अनिश्चितता बनी हुई है। बोर्ड एग्जाम के बाद करियर चुनने में दबाव बढ़ा हुआ है। कोर्सेस के चयन, एडमिशन के कई राउंड और एआई और डिजिटल क्रांति से जुड़ी अनिश्चितताओं ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले पांच वर्षों में किस कोर्स या करियर की कितनी मांग रहेगी, इसका पूर्वानुमान लगाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। केस 1: छात्र को नींद नहीं आ रही :एक छात्र को बोर्ड एग्जाम के साथ ही भविष्य को लेकर गहरी चिंता ने घेर लिया। उसके मन में यह सवाल उठ रहा है कि वह किस क्षेत्र में आगे बढ़े। कई बार रात भर नींद नहीं आती और दिमाग में लगातार विचार घूमते रहते हैं। माता पिता की भी यही स्थिति बनी हुई है। वह अक्सर अपने बच्चे की चिंता से परेशान रहते हैं। बच्चे के साथ ही माता पिता की भी काउंसलिंग की जा रही है। केस 2: तकनीकी चुनौतियों में करियर की उलझन : एक छात्र ने बताया कि एआई और डिजिटल क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण उसे यह संदेह होने लगा है कि भविष्य में कौन सा कोर्स अधिक उपयुक्त रहेगा। आजकल तकनीकी क्षेत्र में इतनी तेजी से बदलाव हो रहे हैं कि भविष्य का अनुमान लगाना मुश्किल है। इस असमंजस और अनिश्चितता के चलते, छात्र ने महसूस किया कि केवल वर्तमान की मांग पर निर्भर रहना भविष्य में सही दिशा का निर्धारण करने में सहायक नहीं होगा। केस 3: पारिवारिक दबाव से तनाव बढ़ा : एक 12वीं की छात्रा, जिसकी असली रुचि कॉमर्स में है, लेकिन माता-पिता डॉक्टर हैं। पारिवारिक दबाव के कारण उसे मेडिकल में प्रवेश लेना पड़ा, फिर भी उसे नीट क्लियर करने का भरोसा बिल्कुल नहीं है। उसका मन तो हमेशा कॉमर्स में लगा रहा है, लेकिन माता-पिता की उम्मीदें पूरी करने के लिए मेडिकल में जाना पड़ा। अब वह तनाव में है कि नीट में सफल हो पाएगी या नहीं। केस 4 :जेईई में असफलता और भविष्य की अनिश्चितता : 12वीं के एक छात्र ने पहले अटेम्प्ट में जेईई नहीं कर पाने के बाद दूसरे प्रयास की तैयारी शुरू कर दी है। पहले प्रयास में असफल होने के बाद आत्मविश्वास काफी टूट गया है। अब वह कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन मन में यह डर बना हुआ है कि अगर मैं फिर से सफलता नहीं पा सका, तो भविष्य क्या होगा। इंटरनेशनल ट्रेनर वर्षा निगम का कहना है कि आज केवल एक डिग्री लेने से काम नहीं चलेगा। आने वाले पांच वर्षों में तकनीकी, डिजिटल और एआई से संबंधित क्षेत्रों में उछाल आएगा। छात्रों को अपनी स्किल्स में सुधार करना चाहिए और खुद को अपडेट रखना चाहिए। करियर काउंसलिंग एक्सपर्ट डॉ. हरप्रीत सिंह का कहना है कि छात्रों को चाहिए कि वे न केवल वर्तमान की मांग देखें बल्कि भविष्य में होने वाले बदलाव और उनके स्किल सेट के अनुसार निर्णय लें। वर्तमान में करियर विकल्पों के चयन में पारंपरिक शिक्षा पद्धति से हटकर नए क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए।


