भास्कर न्यूज | उदयपुर छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारियों की हालत लगातार बिगड़ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत हजारों मकान पूरे हो चुके हैं। लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया। प्रदेश में 10 साल से अधिक सेवा दे चुके हजारों कर्मचारी हैं। फिर भी जॉब सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, मेडिकल सुविधा और मृत्यु उपरांत सम्मान जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। पिछले साल 9 साल पूरे कर चुके 4,966 मनरेगा कर्मियों का नियमितीकरण हुआ था। बाकी कर्मचारियों के लिए अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनी। चुनावी मंचों पर किए गए वादे भी अधूरे रह गए। हालात इतने खराब हैं कि चार महीने से वेतन नहीं मिला। नाराज कर्मचारी अब तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करेंगे। 26 और 27 मार्च को जिले में हड़ताल रहेगी। 27 मार्च को सभी जिलों में रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 28 मार्च को राज्य स्तरीय हड़ताल होगी। इस दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय सिंह क्षत्री ने बताया कि हड़ताल को लेकर सभी जनपदों में ज्ञापन सौंपा जा चुका है। कर्मचारी पिछले एक साल से मानव संसाधन नीति लागू कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए कमेटी बनी थी, जिसे 15 दिन में रिपोर्ट देनी थी। लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण अब तक कोई फैसला नहीं हुआ। इसके विपरीत मनरेगा कर्मियों से अन्य विभागों के भी काम लिए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम जनमन, स्वच्छ भारत मिशन समेत कई योजनाओं में इन्हें लगाया गया।


