बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर नगर पंचायत के परिषद की पहली बैठक में सर्वसम्मति से वाड्रफनगर का नाम बदलकर वासुदेव नगर करने का प्रस्ताव पास किया गया। रियासतकाल में अंग्रेज अधिकारी के नाम पर नगर का नाम बदलकर वाड्रफनगर किया गया था। निकाय चुनाव के दौरान भाजपा ने वाड्रफनगर का नाम बदलने का वादा किया था। दरअसल, वाड्रफनगर का नाम रियासत काल में गरीया था। गरीया कस्बाई क्षेत्र (वर्तमान एसडीएम मुख्यालय) सरगुजा रियासत का हिस्सा था। यहां लगान वसूलने के अलावा शिकार के लिए अंग्रेज पहुंचते थे। क्षेत्र का बड़ा हिस्सा जंगलों से घिरा है। पूर्व में यहां शेर, बाघ, हाथी और जंगली जानवर विचरण करते थे। अंग्रेज के नाम पर पड़ा वाड्रफनगर नाम रियासतकाल में एक अंग्रेज और सरगुजा स्टेट के महाराजा क्षेत्र में कैंप लगाकर शिकार करते थे। रियासतकाल में एक अंग्रेज अधिकारी वाड्रर ने क्षेत्र में एक शेर का शिकार किया था। वाड्रर के नाम पर गरीया कस्बे का नाम बदलकर वाड्रफनगर कर दिया गया। भाजपा और संघ के लोग इसे गुलामी का प्रतीक मानते हैं। पहली बैठक में नाम बदलने का प्रस्ताव नगरीय निकाय के चुनाव में भाजपा ने नगर पंचायत वाड्रफनगर में बहुमत के साथ कब्जा किया है। नगर पंचायत वाड्रफनगर के अध्यक्ष मानसिंह मारकंडे की अध्यक्षता में नगर पंचायत परिषद की पहली बैठक में वाड्रफनगर का नाम बदलकर वासुदेव नगर करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया। भाजपा ने किया था चुनावी वादा वाड्रफनगर का नाम बदलने की मांग भाजपा करीब एक दशक से कर रही थी। भाजपा ने निकाय चुनाव के पूर्व वादा किया था कि, वे नगर पंचायत में सत्तासीन हुए तो नगर पंचायत का नाम बदला जाएगा। नगर पंचायत परिषद ने वाड्रफनगर का नाम बदलकर वासुदेवनगर करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। नगर पंचायत अध्यक्ष मानसिंह मारकंडे ने बताया कि, इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य शासन को भेजा जाएगा। जल्द की नगर को नया नाम मिल जाएगा।


