महादेव सट्टा एप में मनी लांड्रिंग और अफसरों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच कर रही सीबीआई की टीम गुरुवार को एएसपी अभिषेक माहेश्वरी के राजनांदगांव स्थित मकान और राजधानी के फ्लैट में सील तोड़कर घुसी। करीब तीन घंटे जांच के बाद टीम लौट गई। गहन छानबीन के बाद कुछ दस्तावेजों को जब्त किया गया है। छापे की कार्रवाई के दूसरे दिन भी एएसपी माहेश्वरी सामने नहीं आए हैं। सीबीआई ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक देवेंद्र यादव और उनके करीबियों के अलावा एक आईएएस व 4 आईपीएस अफसरों के साथ दो एएसपी के घरों में छापेमारी की थी। इस दौरान एएसपी माहेश्वरी न तो राजनांदगांव स्थित सन सिटी के अपने मकान में मिले और न ही रायपुर के फ्लैट में। सीबीआई ने दोनों घरों को सील कर दिया गया था। छापे के 24 घंटे बाद भी जब वे गुरुवार सुबह तक सामने नहीं आए तब सीबीआई की टीम एएसपी माहेश्वरी के डोंगरगांव वाले मकान पहुंची। वहां से उनके भाई को साथ लेकर राजनांदगांव के सन सिटी वाले घर आई। उनके भाई की मौजूदगी में सीबीआई की टीम ने घर की सील तोड़ी इसके बाद भीतर रखे दस्तावेज की जांच शुरू की। करीब तीन घंटे तक सीबीआई की टीम एएसपी के घर में रखे दस्तावेज खंगालती रही। छापे के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, पूर्व सीएम भूपेश का आरोप- महादेव एप के संचालकों को भाजपा का संरक्षण
छत्तीसगढ़ में सीबीआई छापे के विरोध में कांग्रेस ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। इसके साथ ही जगह-जगह राज्य सरकार का पुतला दहन किया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ईडी ने झूठी खबर फैलाई कि महादेव एप के संचालक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि ये दोनों दुबई में पंडित प्रदीप मिश्रा के जजमान बने प्रवचन सुनते पाए गए। हमने महादेव एप के खिलाफ मार्च 2022 में पहली एफआईआर दर्ज की थी लेकिन आज भी एप का संचालन हो रहा है और कारोबार बढ़ता जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या महादेव संचालकों को देश के सबसे बड़े आदमी का संरक्षण प्राप्त है। दो एएसआई और आरक्षक से दिनभर पूछताछ महादेव सट्टा एप में प्रोटेक्शन मनी और मनी लांडिंग की जांच कर रही सीबीआई ने तहकीकात तेज कर दी है। गुरुवार को सीबीआई ने एएसआई पूर्ण बहादुर सारखी और संमित मिश्रा के अलावा आरक्षक अमित दुबे को बुलाकर पूछताछ की। खबर है कि उनसे यही पूछा गया कि उन्हें प्रोटेक्शन मनी का कितना पैसा और किन किन अफसरों को बांटने के लिए मिलता था। क्योंकि दोनों एएसआई और आरक्षक पर प्रोटेक्शन मनी के पैसों को अफसरों तक पहुंचाने का आरोप है।


