राजधानी रांची में पिछले 11 महीने में यानी अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक वैक्सीनेशन योग्य कुल लक्ष्य की तुलना में जन्म के तुरंत बाद लगने वाला बीसीजी का टीका 99 प्रतिशत बच्चों को लगाया जा सका। लेकिन इसके साथ लगने वाले पोलियो व हेपेटाइटिस के टीके लेने में अभिभावकों ने ध्यान नहीं दिया। ओपीवी 0 यानी पोलियो की पहली खुराक जन्म के बाद केवल 85% ने ली। 15% अभिभावक बच्चों को टीका लगवाना भूल गए। वहीं, 79% ने ही हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन लगवाया, 21% बच्चे इससे भी वंचित रह गए। जबकि निर्धारित मानक के अनुसार, जिलों में कम से कम 90% को हर हाल में टीका लगना चाहिए, नहीं इनका सुरक्षा चक्र टूट सकता है। नए बच्चे पोलियो की चपेट में आ सकते हैं। बच्चे के जन्म से लेकर 6 वर्ष की आयु तक दो दर्जन तरह के टीके लगते हैं, पर समय की आपाधापी में हम टीकाकरण का टाइम टेबल भूल जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जन्म के बाद एक साल तक के बच्चों को लगभग सभी टीके लग जाते हैं, लेकिन एक से पांच साल तक के दौरान लगने वाली वैक्सीन से अधिकतर बच्चे वंचित रह जाते हैं। वहीं पांच से दस वर्ष की उम्र के दौरान लगाए जाने वाले टीकों का और बुरा हाल है। रोगों से बचाव के लिए बच्चों को कब कौन सा टीका दिलाना जरूरी बीसीजी : जन्म के तुरंत बाद। हेपेटाइटिस बी : शिशु के जन्म के 24 घंटे के भीतर। ओपीवी-0 : शिशु के जन्म के 15 दिनों के भीतर। ओपीवी 1, 3 : शिशु के जन्म के छठे व नौवें महीने में। पेंटावेलेंट 1, 3 : जन्म के छठे, 10वें व 14वें सप्ताह में। रोटावायरस : जन्म के छठे, 10वें व 14वें सप्ताह में। आईपीवी : जन्म के छठे व 14वें सप्ताह में। एमआर-1 : शिशु के जन्म से 9 से 12 महीने के बीच। जेई-1 : शिशु के जन्म से 9 से 12 महीने के बीच। विटामिन ए का पहला डोज : शिशु के 9 महीने पूर्ण करने पर, मिजिल्स रूबेला के टीके के साथ। डीपीटी बूस्टर 1 : 16-24 महीने के बीच। एमआर-2 : 16 से 24 महीने के बीच। ओपीवी बूस्टर : 16 से 24 महीने के बीच। विटामिन ए (दूसरे से 9वां डोज): डेढ़ से 5 साल तक। डीटीपी बूस्टर-2 : 5-6 साल की उम्र में। बच्चों को टीके से वंचित रखना खतरनाक : डॉ. अभिषेक रिम्स के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक रंजन का कहना है कि बच्चों को टीकाकरण से वंचित रखना न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि समुदाय के लिए भी जोखिमपूर्ण है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि टीकाकरण में कमी चिंता का विषय है। इसे ठीक करने के लिए विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। कौन सा टीका कितने को लगा या नहीं लगा टीके लगा नहीं लगा बीसीजी 99 01 ओपीवी-0 85 15 हेपेटाइटिस-बी 79 21 पेंटा-1 89 11 पेंटा-3 88 12 ओपीवी-1 89 11 ओपीवी-3 88 12 मिजिल्स-1 91 09 मिजिल्स-2 90 10 यह भी चिंताजनक…पेंटा- मिजिल्स के भी ड्रॉपआउट ऐसे भी बच्चे स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में दर्ज हैं, जिन्होंने मिजिल्स व पेंटा का एक ही डोज लिया है। या तो उन्होंने मिजिल्स-1 नहीं लिया या मिजिल्स-2 छोड़ दिया। ऐसे ड्रॉपआउट की संख्या एक प्रतिशत है। जबकि पेंटा का एक डोज मिस करने वालों की संख्या 2 प्रतिशत है। ऐसे बच्चों की संख्या, जिन्होंने मिजिल्स का एक डोज लिया और फुल इम्यूनाइजेशन मिस किया है, इनकी संख्या माइनस 11 प्रतिशत है। नोट : आंकड़े प्रतिशत में बच्चे के जन्म के बाद 6 व 9 माह में दूसरी व तीसरी खुराक लेनी है। लेकिन इसमें भी लोग लापरवाही बरतते हैं। पोलियो के लिए लगने वाली ओपीवी-1 और ओपीवी-3 टीके भी पूरी तरह से बच्चों तक नहीं पहुंच पाए हैं, जहां दूसरी खुराक 11% और तीसरी खुराक 12% बच्चों ने नहीं ली है। वहीं, मीजल्स 1 और 2 टीके भी क्रमशः 9% और 10% बच्चों को नहीं लगे हैं। जबकि यह टीका अनिवार्य है। इसके अलावा पेंटा-1 और पेंटा-3 टीकों में भी 11% और 12% बच्चे टीकाकरण से वंचित हैं। पोलियो की दूसरी खुराक से 11% और तीसरी खुराक से 12% बच्चे वंचित 6 साल तक बच्चों को लगते हैं 24 तरह के टीके, 90% को लगना जरूरी


