एचईसी के कामगारों और अफसरों में एचईसी के फिर से रिवाइवल की उम्मीद जगी है। गुरुवार को सप्लाई कर्मी, कामगार और अफसर सभी के एकाउंट में तीन माह का वेतन एचईसी प्रबंधन ने डाल दिया। इन्हें करीब 29 माह से वेतन नहीं मिला था। वेतन मिलने के बावजूद सैकड़ों कर्मियों में उत्साह नहीं दिख रहा है, क्योंकि ये सभी वेतन नहीं मिलने के कारण बैंक के कर्ज में दबे थे। जैसे ही वेतन मिला, बैंक ने इनके द्वारा लिए गए लोन की ईएमआई काट ली। कइयों के पास एक रुपए भी नहीं बचा। कुछ के पास तीन माह के वेतन का 20 से 25 प्रतिशत ही हाथ आया। इन्हें कर्ज से कुछ छुटकारा तो जरूर मिला, लेकिन त्योहारों के समय इनके पास रुपए ही नहीं बचे। अभी बच्चों के स्कूल में दाखिले का समय भी है। ऐसे में कर्मियों में निराशा देखी जा रही है। इस बारे में एचईसी प्रबंधन के एक अधिकारी ने कहा कि हमलोग चाहते हैं कि हर कामगार को वेतन रेगुलर मिलता रहे। बैंक लोन कटा है तो इस पर अभी हम कुछ नहीं कर सकते हैं। इसकी रिकवरी वेतन से ही होनी है। यह भी कहा कि अभी एचईसी के पास 800 करोड़ का वर्कऑर्डर है। वेतन का 20 फीसदी ही हाथ में आया कामगार सुशील कुजूर ने कहा कि तीन माह का वेतन मिला, पर करीब 20% पैसा ही हाथ में आया। क्योंकि वेतन नहीं मिलने से घर चलाने के लिए बैंक से लोन लेना पड़ा था। आधी सैलरी मिले, इसके लिए आवेदन दिया है कामगार जगन्नाथ राम ने बताया कि वेतन तो पर्सनल लोन की ईएमआई में ही कट जाती है। हमलोगों ने 50 प्रतिशत सैलरी मिले, इसके लिए आवेदन दिया हुआ है। प्रबंधन ने लोन का पैसा काटकर ही वेतन दिया क्रेन ऑपरेटर विमल महली ने बताया कि खुशी है कि प्रबंधन ने वेतन दिया। पर मेरे पास कुछ भी नहीं बचा, क्योंकि प्रबंधन ने लोन का पैसा काटकर ही पेमेंट दिया। कामगार बोले… वेतन मिलने की खुशी पल भर में हवा हो गई भेल से ऑर्डर मिलने की संभावना : लीलाधर सिंह हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह ने कहा कि आकांक्षा प्रोजेक्ट के करीब 43 करोड़ रुपए आने पर सभी को वेतन दिया गया है। अब उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस समय करीब 800 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर है। डीफेंस, एनसीएल, भिलाई आदि के वर्क के अलावा कई छोटे-बड़े वर्क ऑर्डर है। भेल से बड़े ऑर्डर मिलने की प्रबल संभावना भी है।


