रांची| ऑड्रे हाउस में चल रहे 4 दिवसीय छोटानागपुर राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन दो नाटकों का मंचन किया गया। पहला नाटक ‘बेकार’ को ओडिशा के झारसुगड़ा से आई टीम मिरर ने प्रस्तुत किया, जिसके निर्देशक सुभाष चंद्र प्रधान थे। वहीं, दूसरा नाटक बंगाल के कुल्टी से आई टीम सुमन आर्ट ने ‘आखिर कब तक’ का मंचन किया, जिसके निर्देशक ओम प्रकाश राम थे। आखिर कब तक? एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब होते हुए भी सब खामोश हैं। इसकी कहानी सदियों पुरानी है, जो आज भी जारी है। हिंदुस्तान में रहने वाले सभी हिंदुस्तानी हैं, फिर भी छुआछूत, जाति-भेद, जमीन व पानी की लड़ाई फूट डाल देती है। जिससे हम एक-दूसरे से नफरत करने लगते हैं। हीन भावना प्रकट करते हैं। इस नाटक में छुआछूत, जातिभेद और ऊंच-नीच से परे जाकर एक होकर रहने को सिखाया। नाटक के निर्देशक ओम प्रकाश राम, लेखक तपन कुमार दत्ता थे। मुख्य भूमिकाओं में अवतार बाबा के रूप में सुबोध कुमार दत्ता, काली- बैद्यनाथ प्रसाद साव, ललन- बबलू राम, गोवर्धन- विशाल पासवान, हरिया- विकास पासवान, कृषसाहू- सरोज साव, भगवान पंडित- ओमप्रकाश राम व पुजारी- तपन दत्ता बने थे। सभी की एक्टिंग को खूब तालियां मिलीं। ‘बेकार’ में एक ऐसे शिक्षित युवा की कहानी दिखाई गई जो नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहा है। एक गरीब परिवार में जन्म लेता है और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता है। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, वह नौकरी की तलाश में कई स्थानों पर आवेदन करता है, लेकिन हर जगह उसे अस्वीकृति का सामना करना पड़ता है। नौकरी न मिलने से निराश होकर वह गलत रास्ते पर चल पड़ता है और अनैतिक साधनों से अपनी आजीविका कमाने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे, वह अपराध की दुनिया में फंस जाता है और उसका जीवन और अधिक कठिनाइयों में घिर जाता है। लेखक व निर्देशक डॉ. सुभाष चंद्र प्रधान थे। संगीत बिनय प्रधान और प्रकाश व्यवस्था जेनामनी सेठ का था। मुख्य भूमिकाओं में सुशांत महाराणा, अर्जुन बंचूर, भावेश प्रधान, अनिल राणा, सोनिया बेहेरा, ममता मैती, संजुक्ता साबत, वर्षारानी ढाल नजर आए। आखिर कब तक : समाज से छुआछूत, जातिभेद और ऊंच-नीच को मिटाने का दिया संदेश ‘बेकार’ : नाटक में दिखाया कि शॉर्टकट से सफलता प्राप्त करने वालों का अंत अच्छा नहीं होता इंग्लैड का रिकॉर्ड ब्रेक करना था : 32 साल से नाटक का मंचन कर रहा हूं। नाटक करने फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी सहित कई देश गया। वहां जाना कि इंग्लैंड के नाम लगातार 35 घंटे तक नाटक करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। मैंने ठान लिया कि इस रिकॉर्ड को तोड़ूंगा। कई साल लगे। छह महीने तक लगातार प्रैक्टिस की, फिर करीब 50 घंटे तक लगातार नाटक का मंचन करने का रिकॉर्ड बनाया। 3 बार रांची आया हूं, यहां के दर्शक अच्छे : रांची के दर्शक कलाकारों को बहुत प्रोत्साहित करते हैं। तीसरी बार यहां आया हूं। मैं मानता हूं कि नाटक की कोई भाषा नहीं होती। जिस तरह ओडिशा में आज भी थिएटर देखने बड़ी संख्या में लोग आते हैं, यहां भी लोगों को आना चाहिए। हमारे यहां तो ठेले वाले भी नाटक देख कर उसकी समीक्षा कर देते हैं कि फलाने एक्टर की एक्टिंग अच्छी नहीं थी। अगस्त से लगातार 100 नाटक करने का रिकॉर्ड बनाऊंगा : एक नए रिकॉर्ड पर काम कर रहा हूं, जिसमें 365 दिन लगातार एक नाटक का मंचन झारसुगड़ा में करूंगा। मानता हूं कि नाटकों का भविष्य अच्छा है। कब तक युवा रील्स की आभासी दुनिया में खोए रहेंगे। कुछ सालों में फिर से सभी संबंधियों-दोस्तों के साथ थिएटर में लौटेंगे। कुंदन कुमार चौधरी. रांची | ओडिशा से आई टीम मिरर के नाम सबसे लंबे समय 49 घंटे 48 मिनट व 12 सेकेंड तक नाटक का मंचन करने का विश्व रिकॉर्ड है। 2023 में नाटक ‘कायेनझुरी’ में 218 कलाकारों ने काम किया था। जिसमें ढाई महीने से लेकर 85 साल तक के कलाकार शामिल थे। इसके निर्देशक डॉ. सुभाष चंद्र प्रधान ने बताया कि छह महीने तक इसकी तैयारी की थी। करीब 50 घंटे के नाटक का मंचन कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड बातचीत : डॉ. सुभाष चंद्र प्रधान


