भास्कर न्यूज | जालंधर एक तरफ लूट व चोरी की वारदातें रोकने के लिए अलग-अलग कॉलोनियों में लोग खुद फंड एकत्रित करके गेट लगवा रहे हैं तोे दूसरी तरफ उन लोगों में भी रोष है, जिन्हें सड़क से गुजरते हुए गेट लगे मिलते हैं। ऐसा तब होता है, जब किसी कॉलोनी में कुछ गेट बंद रखकर मनचाहे तरीके से 1-2 गेट ही खुले रख लिए जाते हैं। जालंधर की पॉश कालोनी मॉडल टाउन में तो रोड पर गेट लगाने को लेकर मामला लोक अदालत में चला गया है। इसे लोक अदालत में रखने वाले तेजस्वी मिन्हास ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में अगली तारीख 24 अप्रैल है। गीता मंदिर और जौहल मार्केट के पास लगाए गए अवैध गेटों को हटाने के मामले में 6 लोग माननीय लोक अदालत गए हैं। इनमें तेजस्वी मिन्हास, करण रंधावा, सुरेश मलिक, संदीप धामी, वरिंदर मलिक और अतुल मेहता द्वारा दायर किया गया है। इस केस में पहली पार्टी पंजीकृत रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन है। दूसरी पार्टी नगर निगम तथा तीसरी पार्टी नगर निगम कमिश्नर है। जिक्रयोग है कि यह नजीर मामला बन गया है। वजह यह है कि जालंधर सिटी में तमाम कॉलोनियों में सुरक्षा के लिए गेट लगाए गए हैं। सरकारी तौर पर इन्हें आज्ञा नहीं होती है। मिन्हास और साथियों ने कहा है कि 2024 में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा अवैध गेट लगाए गए। इसकी लोगों ने व्यापक आलोचना की थी। नगर निगम जालंधर में शिकायतें दर्ज की गईं। जिन्होंने गेट को गिराने के लिए नोटिस जारी किए। हालांकि, नोटिस देने के महीनों बाद भी नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। दलील है कि ये अवैध गेट सभी के लिए असुविधा का कारण बन रहे हैं। ये सड़क सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं और यातायात के सुचारू मार्ग के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं।


