प्रदेश में पहली बार नगर निगम और पंचायत के चुनाव कार्यकाल खत्म होने के बाद होंगे। यही वजह है कि 3 जनवरी के बाद से 14 नगर निगमों में एक-एक कर महापौर की जगह प्रशासक बैठ जाएंगे। सबसे पहले 3 जनवरी को राजनांदगांव और भिलाई चरौदा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके साथ ही निगम और पंचायत चुनाव भी परीक्षाओं की वजह से मई में होने की संभावना जताई जा रही है। 1 मार्च से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, जो 28 मार्च तक चलेंगी। शिक्षा विभाग 15 फरवरी से परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देगा। दोनों चुनावों में सबसे बड़ा अमला शिक्षा विभाग का ही लगाया जाता है। ऐसे में अगर चुनाव 15 फरवरी के पहले नहीं हो पाए तो आचार संहिता अप्रैल में लगेगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने निगम चुनावों को 6 महीने के अंदर करवाने के लिए विधेयक पास करवा लिया है। इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी पंचायतों के चुनाव 6 महीने के अंदर करवाने के लिए अध्यादेश लाने वाले हैं। इससे पहले, विधानसभा में नगन पालिका तथा नगर निगम संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पािरत किया गया। कांग्रेस विधायकों ने इसका विरोध करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। अधोसंरचना के 1000 करोड़ रुपए के बजट की चर्चा नगर निगमों में अधोसंरचना मद में करीब 1000 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसके लिए अनुपूरक बजट में भी 200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। भाजपा इसे अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। इस कार्यकाल में निगमों के निर्माण कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा। अभी 14 नगर निगम में कांग्रेस के महापौर हैं। 3 जनवरी के बाद प्रशासक के बैठने के बाद से यह सभी कार्य भाजपा शासनकाल में गिने जाएंगे। चर्चा है कि यह भी एक वजह निकाय चुनाव को आगे बढ़ाने की है। भाजपा कार्यालय में बनी रणनीति कुशाभाऊ ठाकरे प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को देर रात तक चली बैठक में चुनाव को लेकर लंबी चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ सभी मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, संगठन महामंत्री पवन साय उपस्थित रहे। बैठक में पहले निगम और पंचायत चुनावों को एक साथ करवाने पर चर्चा हुई। फिर यह तय किया गया कि अगर दोनों चुनाव एक साथ होंगे तो अभी पंचायतों के आरक्षण ही तय नहीं हो पाए हैं। इस प्रक्रिया में कम से कम 15-20 दिन लग सकते हैं। इस तरह आचार संहिता 15 जनवरी के बाद ही लग पाएगी। ऐसे में परीक्षाएं बाधित हो जाएंगी। चार घंटे चली बैठक में अंतिम निर्णय यह लिया गया कि अगर 10 जनवरी के पहले सभी प्रशासकीय कार्य हो जाते हैं तो चुनाव फरवरी में करवा लिए जाएं, वरना इसे मार्च के बाद ही किया जाए। पंचायत-महापौर आरक्षण नहीं हुआ
10 जनवरी तक सभी निगमों के महापौर का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। इस बार सरकार महापौर का सीधे चुनाव कराने जा रही है। ऐसे में अभी तक इनके आरक्षण की घोषणा हो जानी थी। जब तक यह नहीं होगा, आचार संहिता भी नहीं लग सकती। वहीं दूसरी तरफ पंचायतों के आरक्षण को भी आगे बढ़ा दिया गया है। निगम चुनाव के लिए संशोधन विधेयक पास किया गया है। अब 6 महीने के अंदर हमें चुनाव करवाना है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही आचार संहिता लागू हो सकती है। -अरुण साव, उपमुख्यमंत्री


