छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) ने अपनी उपस्थिति और मजबूत कर ली है। पदमकोट में नया सुरक्षा कैंप स्थापित किया गया है, जो कोडेलियार, कुटुल और बेदमकोटी के बाद इस क्षेत्र में चौथा कैंप है। यह कदम नक्सल उन्मूलन और बस्तर में शांति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा के साथ विकास को भी बढ़ावा
घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे पदमकोट में अब तक प्रशासन की सीमित पहुंच थी। इस कैंप की स्थापना से न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि नक्सली प्रभाव को भी कमजोर किया जा सकेगा। सुरक्षा बलों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी सरकारी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा। सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को भी फायदा होगा। साथ ही, आईटीबीपी के जवान न सिर्फ सुरक्षा देंगे बल्कि मेडिकल सुविधाएं और बुनियादी जरूरतें भी उपलब्ध कराएंगे। कैंप का उद्घाटन और नेतृत्व
इस नए कैंप का उद्घाटन 41वीं वाहिनी के सेनानी नरेंद्र सिंह ने किया। इस दौरान क्षेत्रीय मुख्यालय भुवनेश्वर के डीआईजी राणा युद्धवीर सिंह, नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और कांकेर रेंज के डीआईजी अमित कामले भी मौजूद रहे। इस मिशन में सेंट्रल फ्रंटियर मुख्यालय के आईजी ओ.पी. यादव का विशेष योगदान रहा है। आईटीबीपी अधिकारी फ्रंट से ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा अभियान और प्रभावी हो रहे हैं। नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बड़ा कदम
स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है और प्रशासन की पकड़ मजबूत हो रही है। आईटीबीपी की मजबूत उपस्थिति से इस क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है।


