भास्कर न्यूज | बालोद प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय आत्मज्ञान भवन आमापारा में गुरुवार को दादी जानकी और दादी गुलजार की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ। दोनों दादियों के चित्र पर बीके विजयलक्ष्मी दीदी, बीके सरिता दीदी, अन्य ब्रह्माकुमारी दीदी और संस्था के भाई-बहनों ने पुष्प अर्पित किए। बीके विजयलक्ष्मी दीदी ने कहा कि दादी जानकी का जीवन नारी शक्ति के लिए प्रेरणा रहा। वे दिव्य गुणों की प्रतिमूर्ति थीं। 104 वर्ष की उम्र तक उन्होंने विश्व को पालना दी। उनके चेहरे पर दिव्यता थी। संस्था को आगे बढ़ाने में उनका बड़ा योगदान रहा। 1974 में वे विदेश सेवा के लिए गईं। महिला होते हुए सबसे अधिक देशों की यात्रा की। उन्हें दुनिया की सबसे स्थिर बुद्धि वाली महिला की उपाधि मिली। उन्होंने बताया कि आज 145 देशों में ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र हैं। यह दादी जानकी की सेवाओं का परिणाम है। उनके नेतृत्व में कई धर्म सम्मेलन हुए। वे सामाजिक सेवाओं में भी सक्रिय रहीं। 38 साल तक संस्था की मुख्य प्रशासिका रहीं। उन्होंने अनेक आत्माओं को श्रेष्ठ जीवन जीने की कला सिखाई। दादी जानकी का जीवन योग की जीती-जागती मिसाल थी। राजयोग के अभ्यास से उन्होंने खुद को शक्तिशाली और आदर्श बनाया। उनका हर वाक्य महावाक्य बन गया। योग-साधना से उन्होंने मन को संयमित, पवित्र और सकारात्मक बनाया। 103 वर्ष की उम्र में भी उनकी ऊर्जा और उत्साह देखने लायक था। भारत ही नहीं, 145 देशों में उन्होंने लाखों लोगों की जिंदगी में सकारात्मकता लाई। मानव कल्याण के लिए विशेष भूमिका निभाई उन्होंने दादी गुलजार के साथ बिताए पलों को भी साझा किया। दादी गुलजार कहती थीं, शरीर से प्राण निकल जाएं लेकिन खुशी न जाए। उनके पास बैठने से अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति होती थी। वे दैवीय गुणों से भरपूर थीं। निस्वार्थ ईश्वरीय स्नेह से उन्होंने विश्व मानव कल्याण के लिए विशेष भूमिका निभाई। दादी कहती थीं, हर कार्य में सफलता का मूलमंत्र है- दृढ़ता। यदि जीवन में दृढ़ता है तो सफलता निश्चित है। उन्होंने कहा, जो भी कार्य किया, दृढ़ता से किया और सफलता पाई। दृढ़ता रूपी चाबी को हमेशा संभालकर रखें। दादियों के कर्तव्यों और शिक्षाओं को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


