अंग्रेजों के जमाने की शकुंतला रेलवे का अधिग्रहण करेगा केंद्र:ब्रिटिश कंपनी के पास है स्वामित्व; सालाना 2 से 3 करोड़ रॉयल्टी अब भी दे रहे

देश में अंग्रेजों के जमाने के रेल नेटवर्क की आखिरी निशानी इतिहास बनाने जा रही है। भारतीय रेल ब्रिटिश कंपनी क्लिक-निक्सन के बनाए शकुंतला रेलवे का अधिग्रहण करने जा रही है। यह खंड अभी सेंट्रल प्रोविंसेस रेलवे कंपनी (सीपीआरसी) के स्वामित्व में है।
महाराष्ट्र में यवतमाल से अचलपुर के बीच 1916 में बना ट्रैक 188 किमी लंबा है। तब इस रूट पर कॉटन बेल्ट के लिए मालगाड़ियां और पैसेंजर ट्रेन चलती थीं। इन्हीं में एक शकुंतला एक्सप्रेस भी थी। इसलिए इसे शकुंतला रेलवे कहा जाने लगा। 1952 में रेलवे का राष्ट्रीयकरण हुआ, लेकिन यह ट्रैक अलग रह गया। साल 2016 में इस नैरोगेज ट्रैक का अधिग्रहण कर 15,000 करोड़ रुपए से इसे ब्रॉडगेज में बदलने की योजना बनाई गई। इसलिए जुलाई 2017 में यवतमाल-मुर्तिजापुर और अप्रैल 2019 में मुर्तिजापुर-अचलपुर खंड पर सेवा रद्द कर दी। तबसे यह ट्रैक बंद है। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे ब्रॉडगेज में बदला जाएगा। भारत के आजाद होने के बाद हुआ था समझौता
देश के आजाद होने के बाद भी इस ट्रैक का स्‍वामित्‍व ब्रिटेन की प्राइवेट कंपनी के ही पास है। वहीं कंपनी इस ट्रैक को संचालित करती है। 1947 में जब देश आजाद हुआ तो भारतीय रेलवे ने इस कंपनी के साथ एक समझौता किया, जिसके अंतर्गत हर साल आज भी भारतीय रेलवे की ओर से कंपनी को रॉयल्टी दी जाती है। सालाना 2 से 3 करोड़ रॉयल्टी अब भी दे रहे
दिलचस्प यह है कि शकुंतला रेल नेटवर्क के उपयोग के एवज में सीपीआरसी को सालाना 2-3 करोड़ रु. रॉयल्टी दी जा रही है। अधिग्रहण से पहले सीपीआरसी 12-16 करोड़ रॉयल्टी की दावेदारी कर रहा है, पर रेलवे ट्रैक मेंटेनेंस आदि मद में इसे एडजस्ट कर सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में अधिग्रहण हो जाएगा।

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