फर्जी टीबी रोगी घपला:एक खाते का कई मरीजों में उपयोग नहीं पकड़ा; कर्मचारियों के साथ अब सॉफ्टवेयर की भी जांच

उदयपुर टीबी (क्षय) रोग विभाग के संविदाकर्मियों की ओर से 81 फर्जी मरीज गढ़कर 8.45 लाख रुपए की दवा और भुगतान उठाने के मामले में दूसरे दिन गुरुवार को भी जांच जारी रही। इस घोटाले का 18 दिसंबर को भास्कर ने खुलासा किया था। गुरुवार को मामले को लेकर जयपुर में राज्य टीबी विभाग के उच्चाधिकारियों की मीटिंग हुई। इसमें उदयपुर व सलूंबर के अधिकारियों को जांच करने को कहा गया। दूसरी ओर, इस बात की जांच भी शुरू हो गई है कि 81 मरीजों के नाम के आगे एक जैसे खाते डाले जाने के बावजूद इसे सॉफ्टवेयर ने पकड़ा क्यों नहीं? इसकी जांच के लिए उदयपुर के जिला टीबी अधिकारी डॉ. आशुतोष सिंघल ने राज्य टीबी अधिकारी को पत्र भी लिखा है। इसमें आगामी कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश भी मांगे हैं। बताया जा रहा है कि सॉफ्टवेयर में जनाधार को जोड़ने जैसी प्रक्रिया भी की जा सकती है। बता दें कि सराड़ा ब्लॉक की सेमारी सीएचसी में संविदा पर कार्यरत डाटा ऑपरेटर भगवान पटेल व लैब टेक्नीशियन रितिक मेघवाल ने टीबी के 81 फर्जी मरीज बनाए। इसके बाद इन्हें निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाले पैसों का भुगतान लेने के लिए अपने, परिवार व पड़ोसन के खाता नंबर डाल दिए। नाम-एड्रेस में भी fhsb जैसे मनगढ़ंत शब्द लिख दिए। इसके जरिये 8.45 लाख की दवा और भुगतान उठा लिया। भास्कर के खुलासे के बाद बुधवार को मामले में जांच शुरू हो गई थी।

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