एसडीएम का एक और कारनामा:बॉर्डर पर 21 बीघा सरकारी जमीन के लिए बदला सरकार का फैसला, अब गांव अवैध!

बाड़मेर से मुनाबाव जाने वाले हाइवे पर बसे गागरिया गांव के लोगों को अपने घरों से बेदखल होने का डर सता रहा है। इसका कारण सहायक कलेक्टर व उपखंड अधिकारी कोर्ट, रामसर में पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार की ओर से 11 मार्च को किया गया फैसला है। जिसमें एसडीएम ने गागरिया की 21 बीघा सरकारी और आबादी जमीन को बच्चू व इनायत नामक लोगों के पक्ष में कर इसका हाथोंहाथ म्युटेशन खुलवा दिया। इससे गांव में हाइवे के दोनों ओर बसे अधिकांश घर और दुकानें अतिक्रमण की जद में आ गए। लोगों को कानूनी नोटिस देकर जमीन खाली करने को कहा गया है, वरना इसे बुल्डोजर से तोड़ने की चेतावनी दी गई है। खातेदार को सौंपी गई जमीन पर करीब 500 मकान व दुकानें बनी हुई हैं और 150 लोगों के पास पंचायत के पट्टे भी हैं। फिर भी गांव के लोग दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हो रही। ग्रामीण मौजूदा कलेक्टर टीना डाबी से लेकर तत्कालीन कलेक्टर निशांत जैन को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। लोग बोले-आजादी से पहले बसे, अब बेदखल का डर जेठाराम चौधरी | मेरा परिवार यहां 81 साल पहले बसा। कला पुत्र नसीर और कादरा पुत्र नसीर से मेरे पूर्वजों ने प्लॉट खरीदे। अब उनके पोते शकूर पुत्र कादरा, इनायत पुत्र कला खां हमें बेदखल करना चाह रहे। मकान खाली करने का नोटिस दिया है। एसडीएम रामसर से भी धमकियां दिलाईं। मोहम्मद सईद | गागरिया में हम 50 साल से रह रहे हैं। गांव में हमारी दुकानें है। गांव की 25 से 30 बीघा जमीन का मामला है। इनायत व कला से जमीन खरीदी थी। रामसर एसडीएम पब्लिक से करोड़ों रुपए वसूलना चाहता है। दो बार कलेक्टर को ज्ञापन दे चुके। अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। शेष | पेज 4 ऑनलाइन राशन कार्ड से एसडीएम के परिवार का नाम डिलीट बालेवा ग्राम पंचायत में एपीएल श्रेणी के राशन कार्ड एसडीएम अनिल जैन के परिवार का जारी हुआ है। इसमें एसडीएम का भी नाम दर्ज है। जमीनों का मामला उजागर होने के बाद ऑनलाइन राशन कार्ड डिलीट कर दिया गया। ये 2 या 3 दिसंबर को गडरा रोड बीडीओ को कहकर करवाया। जबकि इसके लिए ग्राम वीडीओ की रिपोर्ट जरूरी है। ऑफलाइन राशन कार्ड अब भी है। आजादी के पहले से बसा ये गांव बिक गया… अब बुलडोजर का खौफ 2024 में 11 मार्च को एसडीएम रामसर ने फैसले को बदलते हुए 21 बीघा सरकारी व आबादी जमीन की खातेदारी बच्चू व इनायत के नाम की। दोनों को खातेदार-काश्तकार घोषित किया। 2003 में बाड़मेर एसडीएम ने दोनों खसरों की 21 बीघा में से 10 बीघा आबादी घोषित किया। 11.11 बीघा को सरकारी जमीन किया। आबादी भूमि को कलेक्टर ने पंचायत को सौंपा। 2012 में आरएए ने एसडीएम बाड़मेर के निर्णय पर पुनर्विचार का आदेश दिया। 2012 में एसडीएम रामसर ने साक्ष्य पेश करने का अंतिम अवसर दिया, लेकिन निर्णय नहीं हो सका। 1993 में बाड़मेर एसडीएम ने बच्चू व इनायत पुत्र कला की खसरा संख्या 99 व 99/2 की कुल 21 बीघा 11 बिस्वा जमीन पर खेती नहीं होने की रिपोर्ट पर सरकारी घोषित कर दिया।

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