सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने बायोमेडिकल वेस्ट के संग्रहण से लेकर निस्तारण तक की प्रक्रिया में बारकोडिंग प्रणाली को लागू करने पर अब सख्ती कर दी है। यह पूरा सिस्टम एक सॉफ्टवेयर के जरिए संचालित होगा, जिसे मोबाइल एप से ट्रैक किया जा सकेगा। शहर में करीब 450 से ज्यादा हेल्थ केयर फैसिलिटी हैं, लेकिन 290 से ही बायोमेडिकल वेस्ट का कलेक्शन हो रहा है। बाकी 160 संस्थाओं का बायो कचरा नगर निगम के ऑटो टिपर से बल्लभ गार्डन स्थित डंपिंग साइट पर जा रहा है। खुले में पड़े इस संक्रमित बायो कचरे पर दिनभर आवारा पशु मंडराते हैं। दरअसल केंद्रीय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने बायोमेडिकल वेस्ट नियम 2016 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लिनिक, डिस्पेंसरी, वेटरनरी हॉस्पिटल्स, पशु गृह, पैथोलॉजिकल प्रयोगशाला, ब्लड बैंक, स्वास्थ्य देखभाल सुविधा और नैदानिक प्रतिष्ठान पर बार कोड लेबलिंग प्रणाली 27 मार्च 2019 तक लागू करने के निर्देश 2018 में दिए थे। लेकिन इन नियमों को लेकर राज्य पॉल्यूशन बोर्ड और हेल्थ केयर फैसिलिटीज ने गंभीरता नहीं दिखाई। मानव स्वास्थ्य को देखते हुए बोर्ड ने अब इन नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों को दिए हैं। बारकोड सिस्टम एकत्रित, उपचारित और निपटाए जा बायोमेडिकल वेस्ट की मात्रा का लेखा-जोखा रखने में मदद करेगी। सरकारी और निजी अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब आदि संस्थानों में इसे लेकर हलचल मची हुई है। जानकारी के अनुसार सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने देश भर की सभी हेल्थ केयर फेसिलिटी के लिए यह सिस्टम लागू किया था। उसके बाद कोरोना आ गया। कोरोना के दौरान कोविड का वेस्ट इस सिस्टम के तहत उठाया जाता था। कोरोना के जाने के बाद इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। क्या है नियम – जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत इसमें संशोधन के अनुसार 27 मार्च 2019 तक सभी हेल्थ केयर फैसिलिटीज को बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के बेग या कंटेनर पर बार कोड लगाना होगा भास्कर एक्सप्लेनर – जानिए कैसे काम करेगा बारकोड सिस्टम कैसे काम करेगा सिस्टम सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, दिल्ली ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। लोकल वेंडर हेल्थ केयर फैसिलिटी का डेटा उसमें अपलोड करेगा। बीकानेर में बायोमेडिकल वेस्ट कलेक्शन का का काम कर रही कंपनी ई टेक प्रोजेक्ट ने बारकोड बनाने के लिए वेस्ट कोड कंपनी से एमओयू किया है, जाे बारकाेड जेनरेट करके देगी। हेल्थ केयर सेंटर्स को कंपनी से बारकोड खरीदना होगा। इसके लिए उन्हें अपने सेंटर का डेटा देना होगा। यह डेटा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सॉफ्टवेयर वाले डेटा से मैच करेगा। कंपनी तीन तरह के मोबाइल एप तैयार करेगी, जिनमें हेल्थ केयर सेंटर, बायो वेस्ट और गाड़ियों का डेटा रहेगा। उसके बाद हर बेग पर बार कोड का लेबल लगाना होगा। इस लेबल को मोबाइल एप के जरिए ट्रैक किया जा सकेगा। वेस्ट कलेक्शन से लेकर निस्तारण तक की जानकारी एप से मिलेगी। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड भी इस पर नजर रख सकेगा। – वर्जन “क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर आ रही समस्याओं का समाधान करने के लिए शुक्रवार को कैंप रखा गया है। इसमें सभी प्राइवेट हेल्थ सेंटरों के डॉक्टरों को बुलाया गया है।” -डॉ. एसएन हर्ष, सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन “सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के बायाेमेडिकल वेस्ट के निस्तारण काे लेकर सख्ती कर दी है। प्राइवेट हेल्थ सेंटर संचालकाें काे इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। नियम 2016 की जानकारी देने के लिए शुक्रवार काे आईएमए के साथ वर्कशाॅप रखी गई है।” -राजकुमार मीणा, क्षेत्रीय अधिकारी, पाॅल्यूशन कंट्राेल बाेर्ड


