भास्कर न्यूज | कोरबा करतला ब्लॉक के नवापारा में किसानों ने पहले आधुनिक खेती करना सीखा। अब वे पड़ोसी जिलों के किसानों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं। प्राकृतिक प्रशिक्षण केंद्र में अब तक छह जिलों के 630 किसान ट्रेनिंग ले चुके हैं, जहां शुल्क देना नहीं होता है। कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों, प्रोसेसिंग और बिजनेस प्लान बनाना भी सिखाया जाता है। प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना वर्ष 2015 में की गई है। किसानों की मदद से ग्राम बरतोरी विकास शिक्षण समिति इसकी देखरेख कर रही है। पहले यहां नाबार्ड से परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। इसी से जुड़े किसान अब बाहर के किसानों और महिलाओं को प्रशिक्षण देने आगे आए हैं। प्रशिक्षण के बाद ही इस क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की शुरुआत हुई है। बेहतर उत्पादन और इसे मार्केट में पहुंचाना भी बड़ी चुनौती रहती है। इसके लिए ही बिजनेस प्लान तैयार करना भी बताया जाता है। अभी तक बिलासपुर, रायगढ़, अंबिकापुर, महासमुंद, जांजगीर चांपा और दुर्ग जिले के किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इसमें किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह और कई एनजीओ भी शामिल हैं। प्रशिक्षण केंद्र परिसर में ही काजू, चिरौंजी की प्रोसेसिंग यूनिट है। कोल्ड प्रेस्ड तेल इकाई, बायो लैबोरेट्री, प्रशिक्षण हाल और प्राकृतिक खेती हब केंद्र के प्रमुख आकर्षण है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र, बायो रिसोर्स सेंटर कैंपस और परियोजना क्षेत्र है। जैविक खेती की विधि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कृषि पद्धतियों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। नर्सरी निर्माण और पौधरोपण के लिए भी तरीके बताए जाते हैं। खाद के साथ दवाई बनाना भी सिखाया जाता है। केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डालेश्वर कश्यप और रितिक गोयल का कहना है कि केंद्र में देखकर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इससे सीखने में आसानी होती है। खेती के तीन मॉडल भी बनाए गए हैं। { ए- ग्रेट फार्मिंग मॉडल: वैज्ञानिक पद्धति से कृषि करने से अधिक उत्पादन होता है। साथ ही मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है। { आरडीएस फार्मिंग मॉडल: पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कृषि तकनीक को एकीकृत करने वाली एक संसाधन कुशल खेती प्रणाली है। { एटीएम फार्मिंग मॉडल: उन्नत कृषि तकनीक को अपनाकर टिकाऊ और लाभदायक कृषि को बढ़ावा देने करने वाला यह विशेष मॉडल है। उत्पादन बढ़ाने और संतुलन बनाने खेती के तीन मॉडल


