सिरमटोली सरना स्थल में बने सामुदायिक भवन की दीवारों को पारंपरिक चित्रों से सजाया गया है। इसके बारे में सरना स्थल के पास की निवासी पुष्पा मिंज ने कहा कि हमलोग जल, जंगल और जमीन की पूजा करते हैं और उसी से जुड़े हुए हैं। पेंटिंग में सबसे ऊपर प्रकृति की पूजा करते हुए दिखाया है। इस दौरान हमलोग नगाड़ा, मांदर की थाप और भेरी की धुन पर पारंपरिक नृत्य करते हैं। बीच वाली पेंटिंग में यह दर्शाया गया है कि सरहुल पूजा के पहले महिलाओं द्वारा पाहन का स्वागत किया जाता है। इस क्रम में महिलाएं पाहन के पैर धोती हैं, उनको नहलाया जाता है। इसके बाद पाहन पूजा के लिए जाते हैं। सबसे नीचे की पेंटिंग में यह दिखाया गया है कि हमारा समुदाय सभी पर्व-त्योहार एक साथ मनाता है। नीचे की पेंटिंग की शैली बहुत पुरानी है। इसमें देखा जा सकता है कि एक महिला, एक पुरुष, फिर एक महिला के बाद पुरुष हाथों में हाथ डाले सभी नृत्य कर रहे हैं। इसका यह मतलब है कि हमलोग एक साथ नृत्य करते हैं। महिला या पुरुष दोनों बराबर हैं। बंगाल के 10-12 कलाकारों द्वारा पेंटिंग को एक सप्ताह में बनाया गया है।


