श्री देवी तालाब मंदिर में 500 महिलाओं ने एकसाथ किया दुर्गा सप्तशती का पाठ

इस बार नवरात्र में तृतीया तिथी का क्षय है। इस कारण द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन यानी सोमवार 31 मार्च को है। आज मातारानी के ब्रह्माचारिणी और चंद्रघंटा दोनों स्वरूपों की पूजा की जाएगी। इसका अर्थ है िक इस साल चैत्र नवरात्रि नौ दिनों की नहीं बल्कि केवल आठ दिनों की ही है। विद्वानों के अनुसार, मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप दिव्य और आलौकिक प्रकाश लेकर आता है। मां ब्रह्माचारिणी के नाम में ही उनकी शक्तियों की महिमा का वर्णन है। माता के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, संयम, सदाचार में वृद्धि होती है। मां के आशीर्वाद से जीवन के कठिन से कठिन समय में भी इंसान अपने पथ से विचलित नहीं होता है। माता की शक्ति के प्रभाव से तन-मन के सभी दोष दूर होते हैं। जालंधर| चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन शहर के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। प्रथम दिन श्री देवी तालाब मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, शिव दुर्गा मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, चामुंडा मंदिर, वैष्णों देवी मंदिर, दुर्गा मंदिर, चिंतपूर्णी मंदिर, दुर्गा मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थानों पर भक्तों ने मां के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की। सुबह 6 बजे से ही भक्त मंदिरों में जुटना शुरू हो चुके थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने-अपने घरों में भी घट स्थापना की। शहर के सिद्धिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में एकसाथ 500 से अधिक महिलाओं ने दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर मां भगवती के जयकारों से गूंज उठा। सिर पर लाल रंग की चमचमाती चुनरी ओढ़े महिलाएं मंदिर प्रांगण में एकत्र हुईं। सिद्धि शक्तिपीठ में इसके लिए श्री ज्योति पूजन और दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन किया गया। मां भक्ति के विभिन्न स्वरूपों- देवी सरस्वती, मां लक्ष्मी व मां वैष्णों की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित की गईं। श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ कर महिलाओं ने अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। पाठ के समापन पर आरती भी की गई। इसके बाद मंदिर की संकीर्तन मंडली ने संकीर्तन कर भक्तिमय माहौल बनाया। नवरात्र के प्रथम दिन सिद्धिशक्तिपीठ में दर्शन के लिए लगी भक्तों की कतार।

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