अनूपपुर-कटनी तीसरी रेल लाइन का काम पूरा:165 किमी लंबी लाइन में 135 पुल बने, यात्री सुविधाएं बढ़ेंगी; बांधवगढ़ नेशनल पार्क तक पहुंच होगी आसान

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अनूपपुर-कटनी तीसरी रेल लाइन परियोजना के 165.52 किलोमीटर का कार्य पूरा हो गया है। इस परियोजना पर 2311 करोड़ रुपए की लागत आई है। दुर्गम पहाड़ों और नदियों के बीच 27 बड़े और 108 छोटे पुलों का निर्माण किया गया है। बिलासपुर रेलवे जोन के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने इसे रेलवे के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। इस परियोजना से यात्री सुविधाओं में बड़ा बदलाव आएगा। ट्रेनों की गति बढ़ेगी और यात्रा अधिक सुरक्षित होगी। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना पूरे क्षेत्र के विकास में मददगार साबित होगी। 31 मार्च को इस परियोजना को कमीशन किया गया। बिलासपुर-कटनी मार्ग की यह तीसरी लाइन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख शहरों को उत्तर भारत से जोड़ेगी। इसके अंतिम खंड बीरसिंहपुर-नौरोजाबाद-करकेली-उमरिया (29.52 किमी) की सीआरएस निरीक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। रेल प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना से बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान होगा। नई ट्रेनों के संचालन से पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। इस परियोजना में कुल 17 स्टेशन हैं, जिनमें एक जंक्शन स्टेशन अनूपपुर है। इसके अलावा सिंहपुर और विलायतकलां में दो यात्री हॉल्ट भी बनाए गए हैं। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त ने किया निरीक्षण बुधवार को मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग ने बीरसिंहपुर – उमरिया स्टेशनों के मध्य लगभग 30 किमी विद्युतीकृत नई तीसरी लाइन का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि तीसरी लाइन के निर्माण से ट्रेनों की रफ्तार तेज होगी और यात्री सुविधाजनक ढंग से गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। नई लाइन का स्पीड ट्रॉयल किया गया मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त ने आब्जर्वेशन कार के साथ स्पीड ट्रायल किया। उन्होंने बताया कि अनुमति के बाद इस तीसरी लाइन पर निर्बाध रूप से गाड़ियों का परिचालन प्रारंभ होगा, जिससे यात्रियों को गतिशील परिचालन का लाभ और सुरक्षित रेल सेवा प्राप्त होगी। निरीक्षण दल में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) आलोक तिवारी, मंडल रेल प्रबंधक राजमल खोईवाल सहित मंडल तथा मुख्यालय के संबंधित विभागों के अनेक अधिकारी शामिल थे।

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