छत्तीसगढ़ सरकार ने निगम मंडलों की सूची जारी कर दी है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पद प्रदेश भाजपा के 36 नेताओं को दिए गए हैं। इनमें से 15 ओबीसी वर्ग के नेता हैं। सतनामी समुदाय से किसी नेता को जगह नहीं मिली है, इसे लेकर सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी भी जताई है। 3 अल्पसंख्यक और 4 आदिवासी नेता भी शामिल हैं। खास बात यह है की सूची में शामिल बड़े निगम मंडल उन नेताओं को दिए गए हैं, जिन्हें पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। सूची सामने आने के बाद बहुत से नेता और कार्यकर्ता खुले तौर पर तो कुछ दबी जुबान में अपनी नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं। अब-जब निगम मंडल की सूची आ चुकी है तो दूसरी सबसे बड़ी चर्चा मंत्रिमंडल में बदलाव की है। खबर है कि प्रदेश में अमित शाह के दौरे के बाद मंत्रिमंडल में दो नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। संगठन के कार्यक्रमों में जो सक्रिय रहे उन्हें तवज्जो
सूची को लेकर भारतीय जनता पार्टी सूत्रों का कहना है कि सक्रिय तौर पर संगठन के कामों में शामिल रहे नेताओं को निगम मंडल में तवज्जो दी गई है । संगठन का सदस्यता अभियान, पिछली कांग्रेस सरकार के समय के किए गए आंदोलन में भूमिका, निकाय चुनाव में अलग-अलग जीत दिलाने वालों को पद दिए गए हैं। संजय श्रीवास्तव, श्रीनिवास राव मद्दी, अमरजीत सिंह छाबड़ा जैसे नेताओं को पार्टी में अलग-अलग कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन की वजह से निगम मंडल में जगह मिली है। निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज रहे कुछ नेताओं को भी एडजस्ट किया गया है। चुनाव हारने वालों को जिम्मा
रायपुर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नंदकुमार साहू को बनाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के रायपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से चुनाव हार चुके साहू को यह पद दिया गया है। राजीव अग्रवाल पार्षद का चुनाव हार चुके हैं उन्हें छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड का अध्यक्ष बनाया गया है। अनुराग सिंहदेव भी पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का अध्यक्ष बनाया गया है। कभी बहुजन समाज पार्टी और फिर कांग्रेस में रहे सौरभ सिंह को खनिज विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है सौरभ 2023 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस से हार चुके हैं। इन नेताओं को संगठन ने पिछले करीब 5 महीनों से अलग-अलग कार्यक्रमों का प्रभारी बनाकर जिम्मेदारी भी दी थी।
मंत्रीमंडल में नाम तय अब घोषणा बाकी
खबर है कि देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 5 अप्रैल को दंतेवाड़ा दौरे के बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल को लेकर सरकार बड़े फैसले कर सकती है। इस वक्त प्रदेश में दो मंत्रियों के पद खाली हैं, इन्हें भरा जा सकता है। प्रदेश संगठन से लेकर दिल्ली तक मंत्री किसे बनाया जाए इसे लेकर कई दौर पर चर्चाएं हो चुकी हैं। नाम करीब-करीब तय हैं, अब घोषणा का इंतजार है। चर्चा है कि प्रदेश की सरकार में नए मंत्री के तौर पर अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, राजेश मूणत जैसे नेताओं में से किसी को जगह मिल सकती है।
श्रीवास ने पद छोड़कर छेड़ी बहस
गौरी शंकर श्रीवास ने खुले तौर पर निगम मंडल में दिए गए पद को ठुकरा दिया है। गौरी शंकर श्रीवास को छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया था, उन्होंने इसे लेकर सोशल मीडिया पर लिखा की पार्टी ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है कि जिसे उठाने में मेरे कंधे असमर्थ हैं इसलिए पद स्वीकार नहीं संगठन के कार्यकर्ता के रूप में ठीक हूं धन्यवाद । इस सोशल मीडिया पोस्ट ने नई बहस को जन्म दे दिया है, भाजपा के कई नाराज कार्यकर्ता और नेता श्रीवास के समर्थन में आ गए हैं। जो चर्चा में नहीं थे वह लौटे
निगम मंडल की सूची में एक नाम चौंकाने वाला था और वह था प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री राम सेवक पैंकरा का। लंबे वक्त से सक्रिय राजनीति से करीब करीब गायब रहे, अचानक निगम मंडल की सूची में उनका नाम हैरान कर गया। रामसेवक पैकरा को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है इनके अलावा सूची में विकास मरकाम, रामप्रताप सिंह, सुरेंद्र कुमार बेसरा भी वो आदिवासी नेता हैं जिन्हें निगम-मंडल में पद मिलें हैं। पैकरा और रामप्रताप सिंह को वापस सक्रिय करने के पीछे चर्चा यह है कि सरगुजा में शक्ति का संतुलन बनाए रखा जा सके।
सरोज पांडेय् के भाई को भी पद
सूची में दुर्ग जिले के बीजेपी नेता और पूर्व सरोज पांडेय् के भाई राकेश पांडेय् का नाम भी शामिल है। उन्हें छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
सोशल मीडिया पर क्या चल रहा


