बूंदी विधायक ने विधानसभा में उठाई जनता की आवाज:कृषि मंडी हड़ताल से लेकर एयरपोर्ट तक, 24 अहम मुद्दों पर की चर्चा

राजस्थान विधानसभा में बूंदी के विधायक ने 5 फरवरी से 24 मार्च तक जिले और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। विधायक ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। विधायक ने गुरुवार को अपने द्वारा विधानसभा में उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों का ब्योरा दिया। उन्होंने राज्य की कृषि उपज मंडियों में चल रही हड़ताल पर स्थगन प्रस्ताव रखा। गृह विभाग पर चर्चा के दौरान प्रदेश में बढ़ते बलात्कार, समरावता आगजनी और शिक्षक मनीष मीणा की हत्या का मुद्दा उठाया। साथ ही बजरी माफिया, साइबर क्राइम और जेल से गैंग संचालन जैसे मुद्दों पर ध्यान खींचा। परीक्षा में छात्रों की जनेऊ उतरवाने का विरोध भी किया। विधायक ने अराफात का मुद्दा नियम 131 के तहत उठाया। उन्होंने अपराधियों से सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा राशि जमा कराने के निर्णय पर सवाल खड़े किए। प्रदेश में ज्वैलरी जांच के लिए हॉलमार्क सेंटर की स्थापना की मांग की। बूंदी के विकास को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए। बूंदी नगर विकास न्यास के गठन की मांग की। केडीए से 64 गांव और केशवरायपाटन नगरपालिका को अलग करने का प्रस्ताव रखा। नगर परिषद बूंदी के विस्तार में मेडिकल कॉलेज तालाबगांव, दलेलपुरा और फूलसागर के पास के क्षेत्रों को शामिल करने की मांग की। विधायक ने रोडवेज बस स्टैंड को पुरानी कृषि उपज मंडी में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा। जिला कलेक्टर कार्यालय, न्यायालय परिसर और अन्य कार्यालयों को एक जगह लाकर मिनी सचिवालय बनाने की मांग की। साथ ही प्रस्तावित एयरपोर्ट का नाम कोटा-बूंदी एयरपोर्ट रखने का सुझाव दिया। 21 मार्च को राजस्थान भू-राजस्व विधेयक पर बोले। 24 मार्च को राजस्थान विधियां निरसन विधेयक और कोचिंग सेंटर नियंत्रण विधेयक पर चर्चा की। उसी दिन राजस्थान विधियां संशोधन विधेयक के तहत केडीए का निरसन और एयरपोर्ट में बूंदी का नाम दर्ज करने की मांग की। न्याय और कानून व्यवस्था पर भी विधायक ने कई गंभीर मुद्दे उठाए। रामगंजबालाजी वेलकम होटल और तालेड़ा में युवकों की हत्या, देवपुरा में अवैध गतिविधियां, माटूंदा रोड पर 11 साल की बच्ची के अपहरण का प्रयास और जमीतपुरा में शराब ठेके पर कहासुनी में युवक की हत्या जैसे मामलों पर चिंता जताई। वन विभाग से जुड़ी समस्याओं में बरुधन, लक्ष्मीपुरा, डोरा डाबी और सिलोर-नमाना रोड के निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर करने की मांग की। गरडदा बांध से निकलने वाली नहरों के लिए एनओसी दिलवाने की बात कही। नवजीवन संघ कॉलोनी और रजत गृह कॉलोनी में रजिस्ट्री नहीं होने की समस्या उठाई। इन कॉलोनियों को वन विभाग के दायरे से बाहर निकालने की मांग की। पहाड़ से सटी आबादी और कृषि भूमि को भी अभयारण्य की सीमा से बाहर करने की बात कही। श्री लालचंद चंदेल से अवैध रूप से 4 लाख रुपए लिए जाने का मामला भी उठाया। नगर परिषद बूंदी से जुड़े मुद्दों में पूर्ववर्ती सरकार द्वारा स्वीकृत 20 करोड़ के सड़क निर्माण टेंडर में से 10 करोड़ की सड़क कांग्रेस शासन में बनने के बाद शेष राशि भाजपा सरकार द्वारा स्थानांतरित करने से विकास कार्य रुकने की बात कही। कांग्रेस सभापति के कार्यकाल में स्वीकृत टेंडरों पर पिछले 11 माह में कोई काम नहीं हुआ। शुरू हुए कार्य भी द्वेषपूर्ण तरीके से रुकवा दिए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सभापति को हटाकर भाजपा की सभापति नियुक्त की गई। कार्यकाल बढ़ाने की अवधि समाप्त होने के बाद भी चुनाव नहीं कराया गया। इसे अवैधानिक बताया। सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर भी कचरा नहीं उठाया गया। वार्डों में कचरा गाड़ियां नहीं चल रही हैं। कांग्रेस शासन में ट्रक यूनियन की करोड़ों की जमीन नगर परिषद को हस्तांतरित की गई थी। अब वहां कचरा डाला और जलाया जा रहा है। पिछले 11 माह में सोमोटों और अन्य कॉलोनियों का एक भी पट्टा जारी नहीं हुआ। जिन लोगों ने राशि जमा कर दी है, उन्हें भी पट्टे नहीं दिए जा रहे। पर्यटन से जुड़े मुद्दों में सुखमहल, स्मृति कुंज और टैरेस गार्डन को स्वदेश दर्शन योजना से बाहर किए जाने पर नाराजगी जताई। नवलसागर और जैतसागर के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत 17 करोड़ रुपए का टेंडर अब तक जारी नहीं हुआ।

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