भास्कर न्यूज | अमृतसर चैत्र नवरात्र के 6वें दिन भक्तों ने मां कात्यायनी का फूलों से शृंगार करके आरती उतारी। इसमें पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर सारा दिन रहा। भक्तों ने मां का व्रत रखकर उपासना करके विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया। देवी का यह स्वरूप ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में जन्मा था, जिसके कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता कात्यायनी की पूजा से विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। मां कात्यायनी को ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। कहते हैं कि श्रीकृष्ण को पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने कालिंदी नदी के तट पर मां कात्यायनी की ही पूजा की थी। देवी का यह स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला और भास्वर है। मां कात्यायनी चार भुजाधारी हैं, जिनके बाएं हाथ में कमल, तलवार और दाहिने हाथ में स्वास्तिक और आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है। माता कौशल्या देवी मंदिर: इस मंदिर के पंडित सोनू ने सुबह मां कात्यायनी की पूजा करके उनके गले में पुष्पों की माला चढ़ाई। इसी दौरान भक्तों का आना जाना शुरु हो गया। मंदिर के सेवादार संजय महाजन की अध्यक्षता में करीब 12 बजे महिला भजन मंडली ने माता रानी का गुणगान किया। इस मौके पर सेवादार महाजन ने बताया कि इस शनिवार को अष्टमी पर कंजक पूजन करके 101 ज्योति जलाई जाएगी। लारेंस रोड बिजली पहलवान मंदिर: छठे नवरात्र में भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मंदिर सुबह पांच बजे खुलते ही भक्तों का तांता लगना शुरु हो गया। हाथों में पूजा सामग्री और फूलों की मालाएं पकड़े भक्तों ने मंदिर में जाकर मां की अराधना करके उनकी आरती उतारी। इसी दौरान पंडितों ने भक्तों को प्रसाद के रूप में नारियल, मिश्री और फल भेंट किए।


