बजट अप्रूव होने के बाद एफएंडसीसी गठन का पेंच डालेगा विकास में अड़चन

शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर निगम हाउस में 5 दिन पहले बीते 29 मार्च को कांग्रेस पार्षदों के हंगामे के बीच 459.45 करोड़ रुपए का बजट और वार्डों में 3 तरह के काम करवाने को लेकर हलकावार 35-35 लाख रुपए के अलावा दूसरे कामों के एजंेडे पास किए गए थे। बजट को लोकल बॉडीज विभाग से अप्रूवल के लिए चंडीगढ़ भेजा जा चुका है, मगर हाउस की मीटिंग में फाइनांस एंड कांट्रेक्ट (एफएंडसीसी) कमेटी बनाने व तोड़ने के लिए मत पास कर मेयर को अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे में 85 वार्डों में पैच वर्क-सीवरेज व छोटे विकास कामों के लिए 5.25 करोड़ रुपए, सिविल वर्क पर 2.82 करोड़ तो स्ट्रीट लाइट्स पर 245.53 करोड़, ओएंडएम सैल के 92.21 लाख के अलावा कंपनी बाग पर 40 लाख रुपए के अलावा अन्य डवलपमेंट कामों के लिए ग्रांट जारी नहीं हो पाएगी। इसके अलावा 750 ट्विन बिन खरीदने के लिए 47.19 लाख रुपए तो 20 हजार डॉग्स स्टरलाइजेशन-वैक्सीनेशन को 3.19 करोड़ के अलावा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन व बॉयोरेमिडेशन का टेंडर का काम भी लटक सकता है। चूंकि हाउस में भले ही एजेंडा पास कर दिया गया हो, एफएंडसीसी कमेटी की मंजूरी के बिना न तो ग्रांट जारी होगी ना ही कोई टेंडर लगाने की अप्रूवल मिल सकेगी। निगम हाउस की मीटिंग में एफएंडसीसी कमेटी गठित करने को लेकर बहुमत से मता पास नहीं कराया जा सका है। ऐसे में अगली मीटिंग बुलाकर कमेटी गठित करनी होगी। आने वाले समय में भी कोई एजेंडा या बजट से रिलेटेड काम कराने होंगे तो इस कमेटी से अप्रूवल लेना जरूरी होगा। एफएंडसीसी कमेटी गठित करने के लिए बजट व एजेंडा की तरह प्रक्रिया अपनाई जाती है। कमेटी को गठित करने और तोड़ने के लिए पार्षदों के बहुमत से मेयर को अधिकार दिया जाता है। यदि पार्षदों ने मेयर को कमेटी गठित करने का अधिकार दिया है, तो सिर्फ गठन कर सकते हैं। कमेटी को तभी तोड़ सकते हैं, जब इसके लिए अलग से अधिकार पार्षदों ने बहुमत से दिया हो। गौर हो कि कमेटी में मेयर-सीनियर डिप्टी मेयर-डिप्टी मेयर के अलावा 2 पार्षद व निगम कमिश्नर होते हैं। वहीं पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी ने बताया कि एफ-एंडसीसी कमेटी की मंजूरी के बिना किसी भी डवलपमेंट से जुड़े कामों के लिए ग्रांट जारी नहीं हो सकती। इसके अलावा टेंडर भी नहीं निकाले जा सकते हैं। 29 को हुई निगम हाउस की बैठक में बजट-एजेंडा बेशक पास होगा गया हो। लेकिन आगे की प्रक्रिया को ग्राउंड लेवल पर उतारने के लिए कमेटी की मंजूरी जरूरी है। कमेटी बनाने और तोड़ने दोनों के लिए पार्षदों के बहुमत से मेयर को अधिकार दिया जाता है। पूर्व मेयर करमजीत सिंह रिंटू को पार्षदों ने कमेटी बनाने का अधिकार दिया था, तोड़ने का नहीं। लेकिन उन्होंने तोड़ दिया तो मामला हाईकोर्ट गया था। कोर्ट ने कमेटी को बहाल कर दिया था। ^जल्द ही एफएंडसीसी कमेटी का गठन कर दिया जाएगा। कमेटी बनाने को लेकर भी प्लान किया जा रहा है। विकास कामों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नए टेंडर लगेंगे तो शहर-वार्ड का विकास होगा। वार्डों में पार्षदों को ग्रांट जारी होगी तो मूलभूत सुविधाओं को समस्याएं जो बनी हुई हैं, वह खत्म होगी। हर महीने मीटिंग भी बुलाई जाएगी। सबकुछ नियमों के मुताबिक किया जाएगा। कोई भी पार्षद उनसे मिलकर समस्याएं रख सकता है। -जतिंदर मोती भाटिया, मेयर

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *