भास्कर न्यूज | कोडरमा जिले के ओम कोशल्या हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर के डॉक्टर पर लापरवाही से एक बच्चे को अपना हाथ गंवाने का मामला प्रकाश में आया है। मामले को लेकर पीड़ित के पिता अजीत कुमार जानपुर निवासी ने उपायुक्त को ज्ञापन देकर उक्त हॉस्पिटल के डॉक्टर पर अपने बेटे के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा है की छह साल के मेरे बेटे अमन कुमार का इलाज में लापरवाही के कारण उसका हाथ काटना पड़ा। परिजन ने ओम कौशल्या हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के संचालक डॉ. विशाल कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसमें बताया कि 16 मार्च को उनका बेटा अमन घर की सीढ़ी से गिर गया था। दाहिने हाथ की कलाई में चोट आई थी। इलाज के लिए उसे रांची-पटना रोड स्थित ओम कौशल्या हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉ. विशाल कुमार ने उसी दिन एक्स-रे कर पक्का प्लास्टर चढ़ा दिया। इसके लिए 18 हजार रुपए लिए गए। कोई बिल नहीं दिया गया। दवा भी उन्हीं की दुकान से ली गई, उसका भी बिल नहीं मिला। 18 मार्च को जब दर्द नहीं रुका तो दोबारा डॉक्टर को दिखाया गया। डॉक्टर ने कहा कि दर्द रहेगा, बच्चे को घर ले जाइए। 22 मार्च को फिर से बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 23 मार्च को बीएचयू बनारस रेफर कर दिया गया। परिजन उसे धनबाद ले गए। वहां डॉ. कैलाश प्रसाद ने जांच कर बताया कि हाथ में गेंग्रीन हो गया है। जान बचाने के लिए हाथ काटना पड़ा। डॉक्टर ने कहा कि हाथ सड़ चुका था। यह इलाज में लापरवाही का नतीजा है। परिजन ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर दोषी डॉक्टर पर कानूनी कार्रवाई की जाए। इधर इस मामले में ट्रामा सेंटर के चिकित्सक डॉक्टर विशाल कुमार का कहना है कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है। बच्चों के कलाई की हड्डी पूरी तरह से टूट गई थी। जिनका ऑपरेशन कर कच्चा प्लास्टर चढ़ाया गया था। बच्चों के परीजन 19 तारीख को जब बच्चों को दिखाने के लिए लाए थे। उसे दौरान हुए बाहर गए हुए थे। अस्पताल में कार्यरत कर्मियों ने बच्चों को देखा था। उसे दौरान उसका हाथ नॉर्मल था। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन और प्लास्टर के संबंध में प्रिस्क्रिप्शन में ही या निर्देश दिया जाता है 19 तारीख से ही बच्चे के प्लास्टर वाले हाथ का रंग नील पड़ने लगा था। मगर उसके परिजनों ने तत्काल उसे दिखाने के लिए अस्पताल नहीं ले आए। वह जब 22 तारीख को बच्चे को दिखाने के लिए आए तो उसे भर्ती कर इलाज करते हुए बेहतर इलाज के लिए 23 तारीख को बनारस रेफर किया गया था। मगर वे वहां न जाकर बच्चों को दूसरी जगह इलाज करने के लिए ले गए । बच्चों के हाथ में गैंग्रीन होने के कारण स्थिति बिगड़ी।


