शहर की सड़कों पर असहनीय शोर मचाने वाले बुलेट के मॉडिफाई साइलेंसरों पर बुधवार को रोड रोलर चलाकर चकनाचूर किया गया। एक साथ करीब एक हजार साइलेंसर नष्ट किए गए। डीसीपी ट्रैफिक अरविंद तिवारी ने बताया कि बुलेट में कंपनी के साइलेंसर को हटाकर तेज आवाज वाले मॉडिफाई साइलेंसर से ध्वनि प्रदूषण पर काफी असर हो रहा था। इसके अलावा लोगों में ऐसे बुलेट चालकों से भय का माहौल भी बनाया जा रहा था। इसी को देखते हुए बीते डेढ़ महीने में हमने 2 हजार 143 साइलेंसर गाड़ियों से उतरवाए हैं। इसमें पहली कार्रवाई में 800 से ज्यादा साइलेंसर को रोड रोलर से नष्ट किया था। दूसरे चरण की कार्रवाई में एक हजार साइलेंसर नष्ट किए। ट्रैफिक पुलिस ने डेढ़ माह में दो हजार से ज्यादा मॉडिफाई सालेंसर पर कार्रवाई की। इस दौरान चेकिंग में सामने आया कि कंपनी तो बुलेट में सामान्य आवाज वाले ही साइलेंसर लगाकर देती है। सड़कों पर असहनीय शोर मचाने वाले इन साइलेंसरों को मॉडिफाई करवा लेते हैं। चेकिंग के दौरान पाया गया कि मॉडिफाई साइलेंसर 120 से 130 डेसिबल तक आवाज निकालते हैं। यह शहर में निर्धारित 55 से 60 डेसिबल आवाज से दोगुना है। एक्सपर्ट के मुताबिक इतनी आवाज लगातार होने से लोगों को सुनने में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। क्योंकि मनुष्य की अधिकतम शोर सहने की क्षमता 120 से 130 तक ही होती है। अब तक नष्ट हुए 1800 मॉडिफाई साइलेंसर सड़कों पर कर रहे थे 22 लाख डेसिबल से ज्यादा का शोर शहर में 200 से ज्यादा मॉडिफाई साइलेंसर पर कार्रवाई कर चुके एक्सपर्ट ट्रैफिक सूबेदार सुमित बिलौनिया बताते हैं कि बुलेट के मॉडिफाई साइलेंसर की चेकिंग में इनकी आवाज 123 डेसिबल से भी ज्यादा सामने आई है। यानी यह सड़कों पर निर्धारित शोर से दोगुना है। इससे अन्य वाहन चालक असंतुलित होते हैं और एक्सीडेंट का खतरा रहता है। वह आम राहगीर के लिए भी यह हानिकारक है। अब तक 1800 साइलेंसर पर रोड रोलर चलाया गया है। यदि इनके शोर को जोड़ें तो 22 लाख ज्यादा डेसिबल की आवाज ये निकाल रहे थे। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 182 (1) 4 और 198 में वाहनों के मॉडिफिकेशन कराने पर 1 से 5 हजार तक जुर्माना प्रावधान है। एक्सपर्ट…इतनी ज्यादा ध्वनि होती है हानिकारक
^तेज आवाज कान में बाल कोशिकाओं और श्रवण तंत्रिका को नुकसान पहुंचा सकती है। लगातार तेज ध्वनि के कारण सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है। निर्धारित से अधिक आवाज के कारण बीपी, चिड़चिड़ापन, सिर दर्द, नींद में परेशानी आदि आने का भी खतरा रहता है।- डॉ. यामिनी गुप्ता, ईएनटी विभागाध्यक्ष, एमजीएम मेडिकल, कॉलेज


