पश्चिमी राजस्थान से सटी करीब 1070 किलोमीटर लंबी भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ अब आसान नहीं होगी। कंटीली तारबंदी के साथ स्मार्ट फेंसिंग का काम शुरू हो गया है।, जिसमें सेंसर लगे हुए हैं। उसकी रेंज में आते ही अलार्म बज उठेगा और घुसपैठिए को वहीं ढेर कर दिया जाएगा। बॉर्डर पर 1999 में कंटीली तारबंदी की गई की। भारत-पाक सीमा की पश्चिमी सरहद को स्मार्ट फेंसिंग से सील करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। करीब 1070 किलोमीटर लंबी स्मार्ट फेंसिंग का यह प्रोजेक्ट श्रीगंगानगर बॉर्डर से शुरू किया गया है। अनूपगढ़ इलाके में कैलाश और शेरपुर सीमा चौकी के बीच 11 किलोमीटर लंबी स्मार्ट फेंसिंग लगाने का प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया है। यह इलाका घग्घर नदी बहाव क्षेत्र का है। जीरो लाइन से महज 150 मीटर की दूरी पर रेत के बजाय पत्थर के फाउंडेशन पर प्लास्टिक कोटेड तारों की दीवार खड़ी की गई। इसे कोबरा वायर, सेंसर और सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। फेंसिंग में बिजली का करंट छोड़ने की भी व्यवस्था है। इस तारबंदी को लांघना आसान नहीं है। खास बात ये है कि इस पर जंक नहीं लगेगा। घग्घर नदी के पानी में भी यह तारबंदी खराब नहीं होगी। बीएसएफ आईजी एमएल गर्ग ने हाल ही में खाजूवाला से लेकर घड़साना तक पांच बीओपी का जायजा लेकर तारबंदी की स्थिति भी देखी है। गौरतलब है कि उस इलाके में बीएसएफ की तारबंदी जीरो लाइन से करीब डेढ़ किलोमीटर मीटर पीछे थी। घग्घर नदी में बाढ़ आने पर तारबंदी पानी में डूब जाती थी। इस इलाके में घना जंगल और खेत हैं। भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय गेट खोल कर एक निश्चित समय के लिए खेती पर जाने की इजाजत दी जाती है। इसके लिए बीएसएफ ने सभी के पास बनाए हुए हैं। वहां से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर पाक रेंजर भी तैनात रहते हैं। इसलिए घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी का खतरा हमेशा बना रहता था। इसे देखते हुए स्मार्ट फेंसिंग का कांसेप्ट इजराइल की तर्ज पर लाया गया है। पिछले साल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ वाले अति संवेदनशील इलाके में शुरू किया गया था। बॉर्डर पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए और भी बदलाव किए जा रहे हैं। भारत-पाक सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग। सभी बीओपी सीआईबीएमएस से लैस : बॉर्डर पर सीमा पार पाकिस्तान में पांच किलोमीटर एरिया तक कड़ी निगरानी रखने के लिए कॉम्प्रहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईबीएमएस) से भारतीय सीमा चौकियों को लैस किया गया है। इसके तहत सभी बीओपी पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो रात में भी पांच किलोमीटर दूर तक पाक सीमा में निगरानी रखने में सक्षम है। सीमा चौकियों पर बने कंट्रोल रूम से जवान बिग स्क्रीन के जरिए तारबंदी पर निगरानी रखते हैं। घुसपैठ पर लगेगी लगाम – बॉर्डर पर कॉम्प्रहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम एक्टिवेट स्मार्ट फेंसिंग में सतर्कता, निगरानी, संचार और डेटा स्टोरेज के लिए थर्मल इमेजर, अंडरग्राउंड सेंसर, फाइबर ऑप्टिकल सेंसर, राडार और सोनार जैसे हाईटेक उपकरण लगाए गए हैं। इस फेंसिंग पर लगी इंफ्रा-रेड और लेजर बेस्ड इंटूजन डिटेक्टर जमीन और नदी के आसपास के क्षेत्र में एक अदृष्य दीवार का काम करते हैं। सोनार सिस्टम नदी के रास्ते घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर देता है। ऐरो स्टेट तकनीक आसमान में किसी भी हरकत पर नजर रखेगी। सुरंग के रास्ते घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने के लिए भूमिगत सेंसर लगाए गए हैं।


